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बहुत याद आती है...

Art By : Ananya Behera 
Art By : Amrita Patnaik 

वो बचपने में मेरा
तुझसे बार - बार लड़ना।
खुद को बेहतर साबित करके
तुझसे आगे बढ़ना।

बड़ी देर बाद समझ में आया कि तू
मुझे खुद से ज्यादा चाहती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

जब भी काम पड़े मुझे,
मैं तुझे फुसलाता था।
तू जब - जब मुसीबत में होती,
मैं खुद को रोक न पाता था।

मैं कुछ भी बोलूँ, तू मुझसे रोष नहीं जताती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

बचपन में पास बिठाकर
वो तेरा मुझे पढ़ाना।
मेरा सारा काम करके
मुझको स्कूल ले जाना।

बचपन की तरह आज भी, तू मेरे नखरे उठाती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

मेरी मनपसंद चीज़ें
बना - बनाकर खिलाना।
गुस्से में मार - पीटकर,
बाद में आकर मनाना।

आज भी कभी दुर्गा, कभी काली,
कभी ममतामयी गौरी नज़र आती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

जब - जब मेरे कदम डगमगाए,
तूने आकर मेरा हाथ थाम लिया।
हर मुसीबत में मैंने
माँ से पहले, तेरा नाम लिया।

कोई मेरे साथ ना भी हो अगर,
एक तू ही भरोसा जताती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

पर तेरी सगाई में जब मंच पर
तू अंगूठी बदल रही थी।
बदल रहा था वक़्त या
मेरी ज़िन्दगी बदल रही थी।

वो समां आज भी जुदाई का एहसास कराती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

तेरी शादी की तैयारी करने की
हिम्मत जुटाना मुश्किल था।
रोता मन और हँसता चेहरा,
असमंजस में ये दिल था।

दुनिया की ये रीत, हर भाई को रुलाती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

बारात के संग जीजाजी जब
घर की ओर आ रहे थे।
आँसू मेरी अंखियों से,
अपने आप निकलते जा रहे थे।

आज भी किसी बारात की आवाज़,
मुझमें वही हूक जगाती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

बिदाई के वक़्त तेरा मुझे
गले लगाकर रोना।
तेरे जाने के बाद घर का
सूना - सूना हर कोना।

अब तो तेरी आवाज़ सुनने के लिए,
ये कान तरस जाती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

रोते - रोते बस उस दिन मैंने
यही कहा कि “दीदी मत जा ना”
“ससुराल के इतने प्यार में
मुझको भूल न जाना।”

आज भी कभी-कभी माँ गलती से,
तुझे आवाज़ लगाती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है।

“लगता है जैसे अब घर में कोई है ही नहीं”
ये हर कोई कहने लगा।
उधम मचाने वाला मैं
गुमसुम सा रहने लगा।

सच्ची तेरे होने पर घर में रौनक आ जाती है।
सच कहता हूँ दीदी तेरी, बहुत याद आती है,
                                     बहुत याद आती है…
-दीपक कुमार साहू
-Deepak Kumar Sahu
22/07/2018
05:10:25 PM

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