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Payal aur Main

पायल और मैं  चौदह साल की हुई तो  मेरे बड़े होने की ख़बर उड़ी।  और तभी ये पायल  आकर मेरे दिल से जुड़ी।  पहले सिर्फ शौक था, फिर जुनून  और अब ये मेरा हिस्सा है।  जिसके सुकून के बिना जीवन जैसे  इक अधूरा किस्सा है।  जब ये मेरा शौक था,  तब श्रृंगार था।  चलते वक़्त बजते घुँघरू  मानो खुशियों का संसार था।  सबसे सुंदर हो मेरे पायल!  ये मेरा जुनून बन गया।  रफ़्ता - रफ़्ता जाने कैसे  ये मेरा सुकून बन गया।  मैं इनसे खुब खेलती हूँ,  साथी सम अपना मन बहलाती हूँ।  कभी माथे पे, कभी गले पे,  तो कभी होठों पर सजाती हूँ।  मेरे पैरों में ग़र पायल ना दिखे  तो समझ लेना मैं उदास हूँ।  हूँ तब बहुत अकेली  चाहे किसी के भी पास हूँ।  जब बड़ी हुई, घर से दूर हुई,  तब यही मेरे साथ थे।  अनजान शहर, अनजान लोग,  अनजान दिन और रात थे।  हर नाकामयाबी ने सच मुझे  अंदर से तोड़ रखा है।  पर इस पायल ने डोर ब...

Virasat

विरासत। एक सफर, एक मंज़िल, राहें कई पर भटकने को, हर कोई है लड़ा पड़ा,  दूजे की पुश्तेनी हड़पने को। अजी क्या रिश्ते,  क्या खून का सबका होना लाल, बिक जाते है ,सारे वसूल यहां, फिर बचा ही क्या रह जाता गवाने को। वक़्त पर मदद कोई नहीं करता, पत्थर मारने जरूर पर सब बेवक़्त आते हैं, कुछ तो बस युही मुस्कुरा देते हैं और हौसले पस्त कर जाते हैं। वो देख चुका होता इतना, समझ उसे भी अब सब आ जाता है, बचता आखरी में रहता कोई, पर इंसानियत उसमें से मर जाती है, एक यही विरासत है इंसान की  जो समय समय पर सब सिखलाती है। लेखक- शिवा रजक 14/08/2019 11:15 pm.

भीष्म की कहानी

Art By : Ananya Behera रिक्शा में बैठ मैं भीषण दोपहर में। कर रहा था विचरण अनजाने शहर में। इसी बीच शहर के बीच एक चौराहा आया। ईश्वर के आशीष जैसे हाथों ने हमें अटकाया। दोपहर के बारह बजे सहकर इतने ग्रीष्म को। खड़ा था एक ट्राफिक पुलिस काया मानो भीष्म हो। कड़ी धूप को शायद उसने मान लिया था जन्नत। इसीलिए अविरल अकेले कर रहा था इतनी मेहनत। कभी हाथ दिखाकर एक तरफ को रोकना। नियम तोड़ने पर दुष्ट लोगों को टोकना। किसी ओर भीड़ ना हो जाए हर वक़्त रखता वो इसका खयाल। भले ही चिल्ला - चिल्ला कर होय बेहाल खुद का हाल। इसके आगे और क्या सुनाऊँ उस भीष्म की कहानी। कड़ी धूप में सर से पाँव पसीने से पानी - पानी। देख कर लगा उसे थकान और गुस्से में चूर होगा। प्रचुर हिम्मत वाला ये इंसान मशहूर तो नहीं मगरूर होगा। इसी बीच धीरे-धीरे एक ओर से एक स्कूल बस गुजारता है। उसमें बैठा हर बच्चा हस्ते हुए उस पुलिस को टाटा - टाटा करता है। खिड़की से हाथ निकालकर बच्चे करते अपनी खुशी का निष्पादन। हँसते हुए ट्राफिक पुलिस आगे आकर करता उनका अभिवा...

मेहनत की कीमत

आज एक कहानी सुनाता हूँ, जिसमें एक सुंदर झोपड़ है। है जिसमें एक मेहनती बाप और एक बेटा जो लोफर है। पिता अपना पेट काट - काटकर थोड़े पैसे जुटाता था। उन पैसों को चुराकर बेटा, हर महीने हजारों रुपए उड़ाता था। बुरी संगति का निखरता असर उसके ऊपर यौवन का जोश। दिखावटी प्रवृत्ति में ही बेटा रहता था मदहोश। बेटे का जीवन था मानो, चंद्र ग्रहण की निशा। बहुत बुरी थी उसकी दशा। बिल्कुल गलत थी जिसकी दिशा। एक रात बेटा फिर खोल रहा था तिजोरी। पिता ने अब पकड़ ली बेटे की चोरी। पिता गुस्से से कहता है मैं हर दिन खून पसीना बहाता हूँ। तब जाकर तेरे भविष्य के लिए। कुछ पैसे जुटा पाता हूँ। बेटा कहता है - ये पैसा तो मेरे लिए है तो क्यूँ आप अकड़ रहे हैं। इस छोटी सी बात को इतना क्यूँ पकड़ रहे हैं। बाप कहता है - जीवन की असलियत से तू बिलकुल है अंजान। इसीलिए तुझे लगता है पैसा कमाना है बिलकुल आसान। पिता : तो ठीक है, मैं भी देखना चाहता हूँ, तेरे नसीब में क्या है लिखा। तू हजारों रुपए उड़ाता है ना, चल पचास रुपए कमाकर दिखा। अपने जीवन में आत्मसम...

देश का दर्पण

कई सालों से हमारी - तुम्हारी सेवा में अर्पण। भारतीय रेल तीन शब्दों में देश का दर्पण। प्लेटफॉर्म में ट्रेन आते ही एक दफा मैंने मौके पे, सीट रोकी रुमाल फेंककर इक झरोखे से। रेलगाड़ी में बैठकर मैं जा रहा था अपने घर। भारत देश का पूरा सच आ रहा था मुझे नज़र। बोरियत दूर करने का एकमात्र सहारा। खिड़की के बाहर वो बदलता नज़ारा। बाहर थे कई बड़े घर और बड़े होटल आलीशान। साथ ही खपरैल और झोपड़ में तड़पती उस गरीब की जान। धरती से आसमान तक बढ़ता उद्योग। हरियाली को खाता जाता, जंगल और गाँव में ये रोग। कभी मिली ठंडी हवा, कभी दिखा प्रकृति का शोषण। बदलती जलवायु और पलपल पनपता प्रदूषण। कभी साफ जलाशय इतना कि दिख जाए उसका तल। कभी ना चेहरा दिखने पाए!! इतना भी गंदा होता है जल… देखने के बाद बाहर का हाल। मैंने किया अपने सिर को अंदर की ओर बहाल। अब सुनाता हूँ आपको खिड़की के अंदर का सार। अंदर के लोगों का अलग था वेश विभिन्न था प्रकार। ये समाज के वो लोग थे जिनकी ये थी दुविधा। कि सारे नियम कानून के ऊपर थी उनकी अपन...