लतीफा याद रखना
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
दुख तो आज अपने ही दे जाते हैं,
तुम औरों को अपना बनाना।
वो भले चोट देकर जाएँ
तुम उन्हें हमेशा हँसाना।
बीते कल का स्वाद, ना तीता याद रखना।
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
बिना हँसी के जीवन का हर
ख्वाब मगरूर होता है।
कामयाब इंसान खुश हो ना हो पर
खुश इंसान कामयाब जरुर होता है।
वर्ना कामयाबी में हँसी का रीता याद रखना।
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
“खुशी एक दृष्टिकोण है ”-वो नहीं समझेंगे
जिन्हें औरों का पतंग काटना आता है।
ज्ञानवान तो वो है जिसे खुशी
तलाशना नहीं बाँटना आता है।
कम से कम तेरा बचपन कैसे बीता याद रखना।
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
“जिंदगी सैकड़ों वजह से रुलाएगी”
किसी पर ना ताने कसना।
सैकड़ों मुसीबत के बीच भी
तुम हर बहाने हँसना।
किसी हँसते बच्चे का,
जूता बाँधते वक्त वो फीता याद रखना।
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
मूरत बिना भगवान हो सकता है,
भगवान बिना मूर्ति नहीं।
सौंदर्य बिना खुशी हो सकती है,
खुशी बिना खूबसूरती नहीं।
होली के मस्ती में पड़े रंगों के छींटे याद रखना
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
तुम्हें खुशी मिलेगी, देख लेना
किसी बंजारे को गाते हुए।
या ईश्वर की तस्वीर देखना
सदा रहेंगे मुस्कुराते हुए।
कीर्तन-भजन, राम-लखन ना सीता याद रखना।
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
मेरा जी चाहता है कि
मैं कुछ ऐसा कर जाऊँ।
कि कोई कविता या लतीफा
लिखकर मर जाऊँ।
कोई मसखरा कैसे है जीता याद रखना।
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
प्रभू मेरे लाश के मुख पर भी खुशी हो
इतना मुझे हास्य का रस दो।
ये कविता पढ़ते हुए तो तुम
थोड़ा सा हँस दो।
इसी बहाने ये कविता याद रखना।
ना कुरान, ना गीता याद रखना।
मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।
-दीपक कुमार साहू
-Deepak Kumar Sahu
22nd July, 2015
04:48:20 PM

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