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शर्मा जी का लड़का

शर्मा जी का लड़का  शर्मा जी के लड़के को हर कोई काबिल बताता है,  ना किसी से उसका नाता है, ना किसी से बतियाता है...  बचपन से हँसमुख लड़का किसी बड़े इमारत में बैठे,  आज हर पल घबराता है, डर डर के मुस्कुराता है...  लंबी जिम्मेदारियाँ लेने की उसमें हिम्मत नहीं,  वो छोटे पौधे लगाता है पर पेड़ नहीं लगाता है...  अब छोटी खुशियाँ उसे खुश नहीं करती,  वो खामियाँ ज्यादा गिनाता है, शुक्र कम मनाता है...  आने वाले कल की फ़िक्र में जागते-जागते,  वो देर तक सो जाता है पर सपने नहीं सजाता है...  उलझा है अपने नौकरी में कुछ इस तरह कि  खाना जरूर खाता है पर स्वाद नहीं बताता है...  जीवन की इस होड़ से निकलने की चाह में,  वो फॉरम तो भर आता है पर सवाल नहीं लगाता है...  गर्मी की धूप और बारिश की बूँद उसे याद करती है,  वो पतंग नहीं उड़ाता है, अब छाता ओढ़ के आता है...  त्योहारों की खुशियाँ देखे बरसों बीत गए,  वो घर तो नहीं जाता है, पर पैसे खूब कमाता है...  जैसे किसी को उम्र कैद की सजा मिली हो,  वो ऑफिस से लौट के आता है और...

Khamosh Raho

खामोश रहो  Image Credit : Meta AI आता जाता हर कोई पूछेगा,, व़क्त ना आ जाए जब तक, खामोश रहो... हर सैलाब तुम पे ही टूटेगा,, ना चल दो आखिरी दाव, तब तक खामोश रहो... सुनकर याद रखना तुम सारे सवाल, जवाब देने का व़क्त आएगा, खामोश रहो... अपमान अपना तुम भुल ना जाना, हर आँसूं कर्ज चुकाएगा, खामोश रहो... भरी मेहफ़िल में तुमपर चिल्लाया गया, ये कहकर कि "तुम छोटे हो खामोश रहो..." एक नतीजा आएगा, तुम उनसे ऊपर बैठोगे, दिल दुखता है? तुम रोते हो? खामोश रहो... तुम जंग के मैदान में तलवार मत गिराना, इक दिन तख़्त बुलाएगा, खामोश रहो... कृष्ण ने भी माफ़ की थी 99 गलतियाँ,, 100 का आकड़ा आएगा खामोश रहो... साथ वाले साथी सब आगे निकल गए,, तुम्हारा किया हुआ मेहनत सच्चा है खामोश रहो...  तुम्हारी क्षमता से डरती थी ये दुनिया,, खुद को बुरा कहने से अच्छा है खामोश रहो... वनवास तुमको भी तोड़ेगा हर पल, श्रीराम की तरह, इंतजार में खामोश रहो... होती है पीड़ा, दुखता है ये दिल,, चीखना है तो जीत में चीख़ना, हार में खामोश रहो... बदलेगा लोगों का लहजा बात करने का,, ताने बन जाएंगीं बधाईयाँ, खामोश रहो.....

Kya Karun?

क्या करूँ?  Image Credit : Meta AI कोई दिल को इतना भा जाए तो क्या करूँ?  वो आँखों में देख के मुस्कुराए तो क्या करूँ?  उससे प्यार नहीं करने का, वादा तो कर लिया,  वो बिंदी लगा के आ जाए तो क्या करूँ?  शर्माने का काम तो उसका होना चाहिए,  वो हद से ज्यादा पास आ जाए तो क्या करूँ?  बंद कमरे में रहने की आदत सी हो गयी थी  वो सरे बाजार मुझे घुमाए तो क्या करूँ?  दुनिया से छिपा के रखना तो चाहता था उसे  मेरे बाहों में वो अपना हाथ सजाए तो क्या करूँ? उसे छुने से परहेज तो कर रखा था मैंने,  वो हाथों से खाना खिलाए तो क्या करूँ?  उससे बातें - वातें, बंद कर दूँगा सोचा था,  वो सामने मेरे रख दे चाय तो क्या करूँ?  कर देंगे नजर-अंदाज उसकी बातों को  वो आँखों से आँखें मिलाए तो क्या करूँ?  ये उजड़ा दिल आबाद ना होगा, मान लिया था,  कोई बस जाए बिना किराए तो क्या करूँ?  रूठ जाने का इरादा तो कर लिया था मैंने  वो काजल लगा के आ जाए तो क्या करूँ? बहुत कोशिश की थी यार!! कि उससे प्यार ना करूँ,  वो साड़ी पहन के झुमके लहराए तो ...

टूटता तारा

Image Generated from Meta AI   अगर प्यार में ये दिल मेरा, हारा ना होता,  ये शायरी ना होती, ये मुशायरा ना होता...  मैं सामने बैठे, ब्लैक-बोर्ड ही देखता रह जाता,  काँधे पे हाथ रख, तुमने अगर पुकारा ना होता...  देख कर तुम्हें मेरी धड़कन यूँ ना बढ़ती  उम्र का वो बरस अगर अठारह ना होता...  दिवाली की उसी रात को ही मर जाता मैं अगर,  एक कान में पहना झुमका तुमने उतारा ना होता... हम किसी और को भी ये दिल दे देते अगर  साड़ी पहनकर तुमने खुदको संवारा ना होता...  बात मेरे प्यार की दुनिया में ना आती अगर  दोस्तों के पूछने पर मैंने स्वीकारा ना होता...  प्यार मेरा बढ़ता गया, नंबर मेरे कमते गए,  अब रातों को बिन बात किए मेरा गुजारा ना होता...  सपनों में रोज़ तुम मिलने चली आती थी,  काश तेरे तस्वीर को मैंने इतना निहारा ना होता...  अपने दिल के प्यार को, दिल में ही रखता अगर,  तो दोस्ती और प्यार का यूं बंटवारा ना होता...  इमरोज के प्यार को मिल जाती एहमियत अगर  तो दुनिया की नजर में, मैं भी बेचारा ना होता...  तुम होती...

Kuch bhi nahi

शब्दार्थ   महताब - चाँद, रुखसार - गाल, चारा-साज़ - डॉक्टर, जॉन - Jaun Elia कुछ भी नहीं  ईद का महताब उसके रुखसार के अलावा कुछ भी नहीं  और मेरे प्यार में, इंतज़ार के अलावा कुछ भी नहीं... उसे देखा तो जाना कि, परियों की दुनियाँ सच्ची है,, मैं तो मानता था, ब्राह्मण में इस संसार के अलावा कुछ भी नहीं... वो एक बार देख लेती है और मैं मर जाता हूँ,, आँखें उसकी सच बोलूँ, एक हथियार के अलावा कुछ भी नहीं... सुबह होती है और मैं सपने भूल जाता हूँ,, याद बस उसकी पायल की झनकार के अलावा कुछ भी नहीं... मेरे दिल के घर को बस तुमने ही हथियाया है,,  और मैं तेरे दिल के किराए-दार के अलावा कुछ भी नहीं... तू कहानी है मेरी... तू मेरी जिंदगी है...  मैं तेरी जिंदगी में एक किरदार के अलावा कुछ भी नहीं...  उसे जो पसंद है वो तोहफे महंगे आते हैं,, और मेरे जेब में रुपये चार के अलावा कुछ भी नहीं... मुझे खुद से मेहनत करना है और जग में आगे बढ़ना है,, विरासत में मिला मुझे संस्कार के अलावा कुछ भी नहीं... मैंने भी कमाएं हैं जिंदगी में कुछ ऐसे रिश्ते,, कि दौलत के नाम पर दो यार के अलावा कुछ भी नहीं... स...

आज दोस्त मिलने आए हैं

  कुछ हालचाल की बात... कुछ हाल फिलहाल की बात...  कुछ मलाल की बात...  जीवन के जंजाल की बात...  ऐसे ही हम महफिल की शुरुआत करेंगे,,  आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...  कुछ इधर की बात...  कुछ उधर की बात... जिधर जा के शर्म भी शर्मा जाए,,  जी हाँ उस कदर की बात...  अच्छी बुरी सारी हद को पार करेंगे,,  आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे... कुछ यार की बात...  कुछ दिलदार की बात...  कुछ इज़हार की बात...  कुछ इकरार की बात...  टूटे दिल के डॉक्टर बनके ऐसा उपचार करेंगे,,  आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे... कुछ हमारी बात... कुछ तुम्हारी बात...  दिल को सुकून दे जाए,, ऐसी कोई प्यारी बात... दोस्त की ताकत याद दिलाकर उत्साहित दिन रात करेंगे,,  आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे... कुछ हँसी की बात....  कुछ खुशी की बात... कुछ उन्हीं की बात...  कुछ जिंदगी की बात...  जैसी भी हो ज़रूरत, मदद हम हाथोंहाथ करेंगें  आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे... कुछ मिलने की बात....  कुछ...

सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ…

एक घर है जहाँ अपने रहते हैं, एक कमरा है जहाँ सपने रहते हैं।  एक ताख है जहाँ तस्वीर रखी है,  एक टेबल है, जहाँ माँ ने खीर रखी है।  एक डॉगी है जो मुझे जान से प्यारा है,  एक टेड्डी है जो मेरा दुलारा है,  इन्हीं के संग कुछ आखिरी पल बीता रही हूँ,  मैं सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ….  एक फ्रिज है, जहाँ से आइसक्रीम चुराती हूँ,  एक गुड़िया है जिसे कहानियाँ सुनाती हूँ।  एक दीवार है, जहाँ मेरे मेडल टंगे हैं,  एक खिड़की, एक दरवाजा है जिसे मैंने रंगे हैं।  एक गुल्लक है जिसमें पैसे जमा हैं,  एक शहर है जहाँ आज भी हसीन समा है।  इन्हीं के संग कुछ आखिरी पल बीता रही हूँ,  मैं सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ….  एक आँगन हैं जहाँ कुछ फुल खिले हैं,  एक स्कूल है जहाँ से जीवन के उसूल मिले हैं।  एक आईना है जिसे देखकर सवरती हूँ,  एक छिपकली है जिससे आज भी डरती हूँ।  एक रसोई है जहाँ मुझे जाने से परहेज है,  एक कोना है जहाँ स्वयं महादेव हैं।  एक किताब है जिसे पूरा पढ़ा नहीं,  एक साइकिल है जिससे मन अभी भरा नहीं।  इन्...

कहानी अभी खत्म नहीं हुई है - अध्याय 5

अध्याय 5   मैं कुछ क्षण के लिए अचंभित रह गया फिर मुस्कराते हुए कहा - नहीं। वह बोला सच बोलिए। मैंने कहा सच बोल रहा हूँ। फिर वह बोला - मेरी एक जी. एफ. है ।मैं बोला - क्या? फिर वह बोला - एक लड़की से मैं करता हूँ। पर मुझे नहीं पता कि वो मुझसे करती है कि नहीं? मैंने पूछा - कहाँ पर रहती है वो? तब उसने बताया कि सिक्किम में। मैंने फिर उसका नाम पूछा। तब उसने बताया कि उसका नाम दृश्या है - उसने धीमे स्वर में कहा। मुझे ठीक से सुनाई नहीं दिया। मैं बोला क्या? क्रिस? फिर उसने कहा क्रिस नहीं दृश्या। मैंने कहा क्या? दिशा? उसने कहा दिशा नहीं दृश्या। आपका कान खराब हो गया है। मैंने कहा - वह नेपाली है ना? तो वो बोला नहीं। वह भी बाहर से आई है मेरी तरह। इस पाँचवी कक्षा के छात्र ने मुझे बड़ा प्रभावित किया मैं मन में हस्ते हुए कहने लगा इक हमारी ही जिंदगी तन्हा रह गई।  मैंने एक लेखक की तरह आलोक की मानसिकता पर शोध करना चाहा। हमारी बातें चलती रहीं। उसने कहा - आपको आपके दोस्त चिढ़ाते हैं? मैंने कहा - अभी तो नहीं पर पहले बहुत चिढ़ाते थे। मैंने यही सवाल उससे किया। उसने कहा कि "हाँ मेरे दोस्त मुझे...

Payal aur Main

पायल और मैं  चौदह साल की हुई तो  मेरे बड़े होने की ख़बर उड़ी।  और तभी ये पायल  आकर मेरे दिल से जुड़ी।  पहले सिर्फ शौक था, फिर जुनून  और अब ये मेरा हिस्सा है।  जिसके सुकून के बिना जीवन जैसे  इक अधूरा किस्सा है।  जब ये मेरा शौक था,  तब श्रृंगार था।  चलते वक़्त बजते घुँघरू  मानो खुशियों का संसार था।  सबसे सुंदर हो मेरे पायल!  ये मेरा जुनून बन गया।  रफ़्ता - रफ़्ता जाने कैसे  ये मेरा सुकून बन गया।  मैं इनसे खुब खेलती हूँ,  साथी सम अपना मन बहलाती हूँ।  कभी माथे पे, कभी गले पे,  तो कभी होठों पर सजाती हूँ।  मेरे पैरों में ग़र पायल ना दिखे  तो समझ लेना मैं उदास हूँ।  हूँ तब बहुत अकेली  चाहे किसी के भी पास हूँ।  जब बड़ी हुई, घर से दूर हुई,  तब यही मेरे साथ थे।  अनजान शहर, अनजान लोग,  अनजान दिन और रात थे।  हर नाकामयाबी ने सच मुझे  अंदर से तोड़ रखा है।  पर इस पायल ने डोर ब...

Tere Aane Se Jana

Art By Amrita Patnaik  तेरे आने से जाना  कि खुशियों का आ जाना क्या होता है... तेरे संग बिता कर पल जाना  कि असल ख़ज़ाना क्या होता है... तूने हाथ थामा तो जाना  कि सच में अपनाना क्या होता है...  सिर्फ बातों में नहीं बल्कि  सच्चा साथ निभाना क्या होता है...  तेरी आँखें उठी तो जाना  कि नज़रों का टकराना क्या होता है...  तेरी आँखें झुकी तो जाना  नशीला मैखाना क्या होता है...  तुझे बाहों में लिया तो जाना  कि दुनिया का सीमट जाना क्या होता है...  तेरा हाथ छुटा तो जाना  कि किस्मत पलट जाना क्या होता है...  तुमने हिम्मत दिया तो जाना  कि जीवन में बढ़ जाना क्या होता है...  तुम साथ खड़ी हुई तो जाना  कि दुनिया से लड़ जाना क्या होता है... तुझे उदास देखा तो जाना  दिल का भर जाना क्या होता है...  तुझे हस्ते हुए देखा तो जाना  एक मुस्कान पे मर जाना क्या होता है... -दीपक कुमार साहू

कहानी अभी खत्म नहीं हुई है - अध्याय 4

अध्याय 4   मैं जब अंदर गया तब बातों बातों में पता चला कि इंदु दीदी के पति यानि मेरे जीजाजी छत पर हैं। नहाने के बाद मुझे अपने बाल बनाने थे। आईना और कंघी हमारे बैग में था। पूछने पर पता चला कि बैग भी ऊपर के कमरे में है। इस कारण मैं ऊपर चला गया। वहाँ तीन कमरे थे। ढूँढते ढूँढते मैं तीसरे कमरे में गया तो देखा कोई सो रहा था। मैंने सोचा हो ना हो यही जीजाजी हैं। मैं उन्हें उठाना नहीं चाहता था। चुपचाप मैं अंदर गया। अपनी बैग की चेन खोली कि तभी मुझे लगा कि चेन की आवाज से वे उठ गए होंगे। अब मैं बाल सवार रहा था कि दीदी आ गई। उन्होंने मेरा परिचय करवाया। मैं उस वक़्त नहीं जानता था कि जीजाजी इस कहानी के अहम किरदार बनने वाले हैं। उन्होंने मुझे पास बिठाया। फिर हम बात करने लगे। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि जीजाजी भारतीय थल सेना में हैं। ऊँचे लंबे कद के, हट्टे - कट्टे ताक़तवर इंसान। सांवला रंग और बुलंद आवाज है इनकी। वो मुझसे पूछने लगे, आप उड़ीसा से आए हैं? उड़ीसा में कहाँ से? वगैरह वगैरह। उनका चरित्र बड़ा मोहक है। उनसे बात करके मुझे बहुत अच्छा लगा। वो मुझसे उड़ीसा के बारे में पूछते रहे, मै...