ढल जाएगी दिन शायद, शाम आने को है, उम्र गुज़र रही है, धुंधले हो रहे हैं नज़रे भी, लगता है, वक़्त आने को है। शैतानियाँ हो गई बहोत, फ़र्ज़ भी बहोत निभा लिए, अब बच्चे फ़र्ज़ निभाने को हैं, आँखें बंद होने को है, लगता है वक़्त आने को है। दिन कम बचे हैं, न और कुछ पाने को है, बस अब सब खोने को है, मेरा समय जाने को है, अब मेरा वक़्त आने को है। मेरा वक़्त आने को है। Writer Shiva rajak 2june 2019
The 'Poet' made the 'Poem' &
The 'Poem' made the 'Poet'