Skip to main content

आज दोस्त मिलने आए हैं

 


कुछ हालचाल की बात...

कुछ हाल फिलहाल की बात... 

कुछ मलाल की बात... 

जीवन के जंजाल की बात... 

ऐसे ही हम महफिल की शुरुआत करेंगे,, 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे... 


कुछ इधर की बात... 

कुछ उधर की बात...

जिधर जा के शर्म भी शर्मा जाए,, 

जी हाँ उस कदर की बात... 

अच्छी बुरी सारी हद को पार करेंगे,, 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


कुछ यार की बात... 

कुछ दिलदार की बात... 

कुछ इज़हार की बात... 

कुछ इकरार की बात... 

टूटे दिल के डॉक्टर बनके ऐसा उपचार करेंगे,, 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


कुछ हमारी बात...

कुछ तुम्हारी बात... 

दिल को सुकून दे जाए,,

ऐसी कोई प्यारी बात...

दोस्त की ताकत याद दिलाकर उत्साहित दिन रात करेंगे,, 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


कुछ हँसी की बात.... 

कुछ खुशी की बात...

कुछ उन्हीं की बात... 

कुछ जिंदगी की बात... 

जैसी भी हो ज़रूरत, मदद हम हाथोंहाथ करेंगें 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


कुछ मिलने की बात.... 

कुछ बिछड़ने की बात 

कुछ करने की बात.... 

थोड़ा लड़ने की बात,, 

जो भी मनमुटाव, हम सब राख करेंगे 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


कुछ कसमें खाने की बात...

कुछ निभाने की बात... 

किसी के दिल में आने से... 

किसी के दिल से जाने की बात,, 

आजकल किसके लिए धड़क रहा है इसका दिल, मालूमात करेंगे... 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


कुछ खोया पाने की बात...

करीब आके दूर जाने की बात... 

कुछ तरसाने की बात... 

कुछ हमें सताने की बात... 

गालियाँ दे दे कर मन के भड़ास को साफ़ करेंगे 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...

 

कुछ उन यादों की बात.... 

टूटे वादों की बात 

जो संग मिल कर सजाए थे हमने 

हाँ उन ख्वाबों की बात 

साथ मिलकर फिर से किसी बिजनेस की शुरुआत करेंगे 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


कुछ कही हुई बात... 

कुछ अनकही बात 

कुछ कुछ गलत 

और कुछ सही बात... 

माँ... आज रात का खाना हम सब साथ करेंगे... 

आज दोस्त मिलने आए हैं, घंटों बात करेंगे...


-दीपक कुमार साहू 

16/05/2021

12:50 PM

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

तुम, मैं और दो कप चाय।

Art By : Amrita Patnaik  दिसम्बर की ठंड और मुझसे दूर तुम। मानो खुद के ही शहर में हो गया मैं गुम। आज भी हर सुबह, वो शाम याद आए, तुम, मैं और दो कप चाय । कड़कती ठंड में भी तुम जैसे, सुबह की हल्की धूप। ढलती शाम में भी निखरते चाँद का प्रतिरूप। वो सारे शाम, जो हमने साथ बिताए, तुम, मैं और दो कप चाय । साथ चलते - चलते उस शाम, तुमने चाय की फरमाइश की। और मेरे ना कहने की तो कोई गुंजाइश न थी। बहुत खूबसूरत लगती हो जब, होठों की मुस्कान, आँखों में आ जाए, तुम, मैं और दो कप चाय । बनते चाय में आता उबाल, जैसे तुम्हारे नाक पर गुस्सा। छोटी - मोटी नोकझोंक, वो भी हमारे प्यार का हिस्सा। तेरा मुझे डाँटना, आज भी मुझे रिझाए, तुम, मैं और दो कप चाय । दोनों हाथों से चाय का गिलास पकड़कर, तुम्हारा वो प्यार से फूँक लगाना। उन प्यारी - प्यारी अदाओं से दिल में मीठा हूँक उठाना। फिर गिलास को चूमती वो गुलाबी होंठ, हाय!!!! तुम, मैं और दो कप चाय । हर चुस्की पर सुकून से तेरा, वो आँखें बंद कर लेना। और खुली आँखों से तुम्हें तकते - तकते मेरा जी...

मेरे सपनों का भारत...

मेरे सपनों का भारत Art By Ananya Behera Drawn By : Anwesha Mishra कल रात को मैंने एक सपना देखा। सपने में वतन अपना देखा। मैंने देखा कि भारत बन गया है विकासशील से विकसित। जहाँ बच्चे से लेकर बूढ़े सभी थे शिक्षित। लोग कर चुका कर अदा कर रहे थे अपना फर्ज़। और काले धन से मुक्त होकर भारत पे नहीं था करोड़ों का कर्ज़। मेरे सपने में तो भारत अमेरिका के भी विकास के करीब था। उस भारत में, हरेक के पास रोज़गार और कोई नहीं गरीब था। जहाँ हर ओर मज़बूत सड़क, ऊँची इमारत और खेतों में हरयाली थी पर्याप्त। जहाँ विज्ञान का विकास और सर्वश्रेष्ठ थी यातायात। जहाँ उच्चतम तकनीकी विकास और विकसित था संचार। जहाँ नेता भलाई करते थे और शून्य पर था भ्रष्टाचार। मेरा सपना यहीं तक पहुँचा था कि हो गयी भोर। मेरी नींद टूट गई सुनकर गली में एक शोर। गली में कोई ऐसा गर्जित हुआ। कि स्वप्न को छोड़, वास्तविक भारत की ओर मेरा ध्यान आकर्षित हुआ। इस शोर ने मुझे देर से सोने की दे दी थी सजा। मैंने खिड़की खोलकर देखा कि शोर की क्या थी वजह? मैंन...

Kya Karun?

क्या करूँ?  Image Credit : Meta AI कोई दिल को इतना भा जाए तो क्या करूँ?  वो आँखों में देख के मुस्कुराए तो क्या करूँ?  उससे प्यार नहीं करने का, वादा तो कर लिया,  वो बिंदी लगा के आ जाए तो क्या करूँ?  शर्माने का काम तो उसका होना चाहिए,  वो हद से ज्यादा पास आ जाए तो क्या करूँ?  बंद कमरे में रहने की आदत सी हो गयी थी  वो सरे बाजार मुझे घुमाए तो क्या करूँ?  दुनिया से छिपा के रखना तो चाहता था उसे  मेरे बाहों में वो अपना हाथ सजाए तो क्या करूँ? उसे छुने से परहेज तो कर रखा था मैंने,  वो हाथों से खाना खिलाए तो क्या करूँ?  उससे बातें - वातें, बंद कर दूँगा सोचा था,  वो सामने मेरे रख दे चाय तो क्या करूँ?  कर देंगे नजर-अंदाज उसकी बातों को  वो आँखों से आँखें मिलाए तो क्या करूँ?  ये उजड़ा दिल आबाद ना होगा, मान लिया था,  कोई बस जाए बिना किराए तो क्या करूँ?  रूठ जाने का इरादा तो कर लिया था मैंने  वो काजल लगा के आ जाए तो क्या करूँ? बहुत कोशिश की थी यार!! कि उससे प्यार ना करूँ,  वो साड़ी पहन के झुमके लहराए तो ...