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अबकी बार!

अबकी बार

अबकी बार शायद छू लूँ चाँद,
अबकी बार शायद, हाँ शायद भर लूँ उड़ान।
अबकी बार कुछ तो कर के रहूँगा,
हाँ अबकी बार, शायद  कुछ के साथ
'"कुछ"" के साथ कुछ तो कर लूँगा।

पक्का तो पता नहीं,पर अबकी बार,
सबका आया होगा, कितनी बार कितना,
खुद से जताया होगा,
कभी पूछा है खुद से, कि ये अबकी बार-- क्या अबकी बार है??
क्यों बार-बार ही ये अबकी बार है।

अजीब है न ये अबकी बार,
शायद ये सबसे बड़ा सवाल है,
ये अबकी बार से पूरी इंसानियत बेहाल है!
पर हाँ ये भी सच है कितनी बार,
ये अबकी बार से हुआ बड़ा बड़ा बवाल है!!

देती है मौके हज़ारो ज़िन्दगी हम सबको,
फिर भी क्यों हम सब का ऐसा हाल है,
न कभी खुद से खुश होते हैं,
न खुद में कोई मिसाल है।
ये अबकी बार के चक्कर में सब फैसले अब आम है!

ये शायद  इंसान ही है, जो सिर्फ इस अबकी बार से परेशां है,
बाकि जिन्होंने इस अबकी बार
को आखरी बार मान लिया,
इस अबकी बार को आखरी बार बना लिया,
और फूँक दी जान, उन्होंने भर ली उड़ान।
भर ली उड़ान!!

अबकी बार में,, हो विश्वास,
अबकी बार में जीतने की हो अगर आस,
चाहे जितनी भी बार हारो पर अगर करो प्रयास,!
हाँ ये अबकी बार शायद  शिखर का हो ये
आभास !

चलो अब,
छोड़ते ये अबकी बार के चक्कर को,
खुद से अब मना लेते हैं,
और अबकी बार नहीं,
और चुप्पी नहीं,
और आराम नहीं ,,
बस अब ये आखरी बार,
जी के देखते है इस सपने को भी यार,!

अबकी बार जीत का ही फरमान हो,
चाहे काम मुश्किल हो या आसन हो।
चाहे मंज़िल चाँद हो या आसमान हो,
ये अबकी बार चाहे मिटा दे मुझे या बना दे
जहाँ हो,
ये अबकी बार माँ के आँखों में आँसू हो खुशी के
पापा के बातों मे गर्व हो, रुबाब में फक्र हो,
अब सिर्फ जीत हो, जीत का सिर्फ जिक्र हो।।

Shiva,,
भूल जाओ अबकी बार,, बस कुछ करना है तोह अभी करना है यार,, so why to wait friends just  beat it!
Be you

10 july,, 11.05 pm
55th poem!!

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