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बातों से कहूँ या अश्कों से



दिल टूटा है मेरा!!

दिल टूटा है मेरा,
ये खुद से मैं नहीं कहता,
चुप ही रहता हूँ मैं,
खुद को दिलासा देते
इसी के साथ मैं रहता।

दिल टूटा है मेरा ,
वजह मालूम है,
पर फिर भी मैं सहता ,
दिल टूटा है मेरा ये
सारा जहां मुझको कहता।

हर दिन के जैसा भी वो दिन था,
पर उस दिन में कुछ हुआ जैसे लगा
कभी भी वो होना नामुमकिन था।
दिल टूटा मेरा,
उस दिल को तोड़ने के लिए ये काम
उसके लिए मुश्किल था।

चलो माना,मोहब्बत सिर्फ मेरी थी,
वो उड़ती परिन्दी तो सिर्फ दिलाशा दे रही थी,
मैं ही पागल था उसके पीछे,
वो तो सिर्फ मुझे पागल समझ,
मुझे वो तीन शब्द कह रही थी।

कोई गिला नहीं थी  मेरी चाहत में,
उसके खिलाफ न कोई भी साज़िश थी,
कुछ भी न करता था ऐसा मैं,
जिससे दुःख पहुँचे उसको,
बस यही मेरी मुझसे फरमाइश थी।

आज कल लोग कहते हैं,
दिल साफ़ होना चाहिए,
पर यहाँ तो चेहरों की कीमत होती है,
उस दिन पता चला,
मैं गैर था उसके ज़िन्दगी में,
भिख माँग रहा था
उसकी गिरगिट जैसे इश्क़ की,
फिर भी झुका मैं बना उस एक तरफ़ा प्यार के लिए फ़क़ीर मैं।

दिल टूटा मेरा उसके इस अधूरे चाहत को देख कर,
पर हाँ गलती तो मेरी ही थी,
जानता था इस रास्ते पे सिर्फ टूटे
खुद से मुलाकात हो जाती है,
फिर भी चला था,
देखने इस इश्क़ के फितरत को।

अब टूटा ये दिल कैसे मैं ये बता दूँ,
हर दिन उसके एक रिप्लाई का इंतज़ार करता था,
लास्ट सीन देखता था,क्यों कि मैं उससे प्यार करता था,
और वो कभी रिप्लाई भी देती
तो बात सिर्फ हाँ या ना में रहती।
कुछ भी पूछता तो इंकार कर देती,
जल्दी  में रहती,
जैसे उसे कही जाना हो,
मुश्किल से 5 मिनट की डेली ये बात होती।
फिर भी घुट-घुट के मैं खुद से कहता,
वो मुझसे प्यार है करती,
लेकिन इज़हार करने से डरती,
बस यही कह के खुद को संभाल लेता,
ये इश्क़ है दूर रहने की,
मैं इस इश्क़ का पहरेदार बन,
हर दिन इसे मुकम्मल करने के लिए पहरा देता।

अब बेवफाई देखनी है क्या तुम्हें उसकी,
आज बीत गया  के एक साल ,
न आया उसका एक कॉल, न मैसेज ,न मिस्डकॉल,
क्या कहूँ बताये जनाब आप मुझे,
ये दिल अब टूट गया मेरा,
उसकी बेवफाई देख कर,
वो झूठी मोहब्बत ,वो झूठे तीन शब्द,
और वो झूठा इश्क़ जो तब्दील की सफाई देख कर।
न हुआ था हमारे बीच कोई झगड़ा ,
न था कोई ऐसा मसला की वो दूर हो जाये मुझसे,
मैंने तो सदा उसे अपने पास बनाए रखना चाहा था,

और मैं ये भी बता दूँ ,
उसके पास ऐसी कोई वजह नहीं,
कि वो दूर जाना चाहे मुझसे,
और मुझको देख दूर खुद से
वो खुश रह पाए।

बस बात ये थी कि उसके चाहने वाले
हज़ार थे,
और मैं सिर्फ उसे ही चाहता था!!

माफ़ करना ए मोहब्बत ,तेरी
जीत की नींव न उसके कदमों से रखी गई,
और न मैं उसकी बेवफाई और सह सकूँगा,
अब भूल जाना चाहता हूँ उसको,

दिल टूटा है मेरा,
ये टूटा है, हाँ टूट गया हूँ मैं,
सच है,
ये कविता नहीं कहानी है,
मेरी ज़िन्दगी की तख़्त ,मेरी
ज़िन्दगानी है।

अब इस मोहब्बत पे
विश्वास नहीं रहा मेरा,
न आपका अब होगा,
झूठे यार और झूठे प्यार से बचे,
अब भूलने की कोशिश कर रहा हूँ ,

उस अंवेष नामक मेरी उस कविता को,
दिल टूटा है मेरा।
और अब अगर कभी जुड़ा तो सच्चे दिल से
किसी को इश्क़ नहीं करूँगा।
चाहे हार गया मैं इस इश्क़ की जंग में,
अब मैं नहीं किसी के लिए जियूँगा।

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