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लतीफा याद रखना

लतीफा याद रखना ना कुरान, ना गीता याद रखना।  मेरे दोस्त लतीफा याद रखना।  दुख तो आज अपने ही दे जाते हैं, तुम औरों को अपना बनाना।  वो भले चोट देकर जाएँ तुम उन्हें हमेशा हँसाना।  बीते कल का स्वाद, ना तीता याद रखना।  ना कुरान, ना गीता याद रखना।  मेरे दोस्त लतीफा याद रखना। बिना हँसी के जीवन का हर  ख्वाब मगरूर होता है।  कामयाब इंसान खुश हो ना हो पर  खुश इंसान कामयाब जरुर होता है।  वर्ना कामयाबी में हँसी का रीता याद रखना।  ना कुरान, ना गीता याद रखना।  मेरे दोस्त लतीफा याद रखना। “खुशी एक दृष्टिकोण है ”-वो नहीं समझेंगे  जिन्हें औरों का पतंग काटना आता है।  ज्ञानवान तो वो है जिसे खुशी  तलाशना नहीं बाँटना आता है।  कम से कम तेरा बचपन कैसे बीता याद रखना।  ना कुरान, ना गीता याद रखना।  मेरे दोस्त लतीफा याद रखना। “जिंदगी सैकड़ों वजह से रुलाएगी” किसी पर ना ताने कसना।  सैकड़ों मुसीबत के बीच भी  तुम हर बहाने हँसना।  किसी हँसते बच्चे का,  जूता बाँधते वक्त वो फीता याद रखना।  ना कुरान, ना गीता याद...

शर्मा जी का लड़का

शर्मा जी का लड़का  शर्मा जी के लड़के को हर कोई काबिल बताता है,  ना किसी से उसका नाता है, ना किसी से बतियाता है...  बचपन से हँसमुख लड़का किसी बड़े इमारत में बैठे,  आज हर पल घबराता है, डर डर के मुस्कुराता है...  लंबी जिम्मेदारियाँ लेने की उसमें हिम्मत नहीं,  वो छोटे पौधे लगाता है पर पेड़ नहीं लगाता है...  अब छोटी खुशियाँ उसे खुश नहीं करती,  वो खामियाँ ज्यादा गिनाता है, शुक्र कम मनाता है...  आने वाले कल की फ़िक्र में जागते-जागते,  वो देर तक सो जाता है पर सपने नहीं सजाता है...  उलझा है अपने नौकरी में कुछ इस तरह कि  खाना जरूर खाता है पर स्वाद नहीं बताता है...  जीवन की इस होड़ से निकलने की चाह में,  वो फॉरम तो भर आता है पर सवाल नहीं लगाता है...  गर्मी की धूप और बारिश की बूँद उसे याद करती है,  वो पतंग नहीं उड़ाता है, अब छाता ओढ़ के आता है...  त्योहारों की खुशियाँ देखे बरसों बीत गए,  वो घर तो नहीं जाता है, पर पैसे खूब कमाता है...  जैसे किसी को उम्र कैद की सजा मिली हो,  वो ऑफिस से लौट के आता है और...

Bambai ki Barsat

बंबई की बरसात  Image Credit : Meta AI ईश्वर का सौगात हो तुम, जिंदगी की शुरुआत हो तुम सबसे छुपाकर रखा जाए,, प्यारी सी वो बात हो तुम, इंतजार को परखा जाए,, छठ पूजा की रात हो तुम, देखने को मन ललचाए,, पूनम का महताब हो तुम, नींद में भी हम मुस्काए,, भोरे भोर का ख्वाब हो तुम वेद पुराण सब व्यर्थ हो जाए,, अगर किसी को ज्ञात हो तुम बातों में कोई जीत ना पाए,, आखिरी शय और मात हो तुम चलते जाता हूँ मुस्काए,, जब से मेरे साथ हो तुम, याद तुम्हारी इतनी आए दिल के ऐसे ज़ज्बात हो तुम अब तुमको कैसे समझाएं मेरी पूरी कायनात हो तुम कोई तुम्हारे करीब आ जाए तब ईर्ष्या का उत्पात हो तुम प्रेम की तरह हम बहते जाएं गंगा की वो घाट हो तुम याद जो, हर बार याद आए उस शाम की मुलाकात हो तुम कभी हँसे तो कभी रुलाए बंबई की बरसात हो तुम... - दीपक कुमार साहू 23rd July 2025 02 : 00 : 35 AM

Khamosh Raho

खामोश रहो  Image Credit : Meta AI आता जाता हर कोई पूछेगा,, व़क्त ना आ जाए जब तक, खामोश रहो... हर सैलाब तुम पे ही टूटेगा,, ना चल दो आखिरी दाव, तब तक खामोश रहो... सुनकर याद रखना तुम सारे सवाल, जवाब देने का व़क्त आएगा, खामोश रहो... अपमान अपना तुम भुल ना जाना, हर आँसूं कर्ज चुकाएगा, खामोश रहो... भरी मेहफ़िल में तुमपर चिल्लाया गया, ये कहकर कि "तुम छोटे हो खामोश रहो..." एक नतीजा आएगा, तुम उनसे ऊपर बैठोगे, दिल दुखता है? तुम रोते हो? खामोश रहो... तुम जंग के मैदान में तलवार मत गिराना, इक दिन तख़्त बुलाएगा, खामोश रहो... कृष्ण ने भी माफ़ की थी 99 गलतियाँ,, 100 का आकड़ा आएगा खामोश रहो... साथ वाले साथी सब आगे निकल गए,, तुम्हारा किया हुआ मेहनत सच्चा है खामोश रहो...  तुम्हारी क्षमता से डरती थी ये दुनिया,, खुद को बुरा कहने से अच्छा है खामोश रहो... वनवास तुमको भी तोड़ेगा हर पल, श्रीराम की तरह, इंतजार में खामोश रहो... होती है पीड़ा, दुखता है ये दिल,, चीखना है तो जीत में चीख़ना, हार में खामोश रहो... बदलेगा लोगों का लहजा बात करने का,, ताने बन जाएंगीं बधाईयाँ, खामोश रहो.....

Kya Karun?

क्या करूँ?  Image Credit : Meta AI कोई दिल को इतना भा जाए तो क्या करूँ?  वो आँखों में देख के मुस्कुराए तो क्या करूँ?  उससे प्यार नहीं करने का, वादा तो कर लिया,  वो बिंदी लगा के आ जाए तो क्या करूँ?  शर्माने का काम तो उसका होना चाहिए,  वो हद से ज्यादा पास आ जाए तो क्या करूँ?  बंद कमरे में रहने की आदत सी हो गयी थी  वो सरे बाजार मुझे घुमाए तो क्या करूँ?  दुनिया से छिपा के रखना तो चाहता था उसे  मेरे बाहों में वो अपना हाथ सजाए तो क्या करूँ? उसे छुने से परहेज तो कर रखा था मैंने,  वो हाथों से खाना खिलाए तो क्या करूँ?  उससे बातें - वातें, बंद कर दूँगा सोचा था,  वो सामने मेरे रख दे चाय तो क्या करूँ?  कर देंगे नजर-अंदाज उसकी बातों को  वो आँखों से आँखें मिलाए तो क्या करूँ?  ये उजड़ा दिल आबाद ना होगा, मान लिया था,  कोई बस जाए बिना किराए तो क्या करूँ?  रूठ जाने का इरादा तो कर लिया था मैंने  वो काजल लगा के आ जाए तो क्या करूँ? बहुत कोशिश की थी यार!! कि उससे प्यार ना करूँ,  वो साड़ी पहन के झुमके लहराए तो ...

तुम मिलने आई नहीं

तुम मिलने आई नहीं  Image generated by Meta AI आईने के सामने कई दफा  प्यार का इजहार किया था  आज के दिन के लिए मैंने कैसे  खुद को तैय्यार किया था  ये बात मैंने किसी को बताई नहीं...  दिन ढल गया तुम मिलने आई नहीं... सोचा था मैंने कि आज तुमको  माता के दरबार लेकर जाऊँगा,  चरणों में गिरकर माता के मैं  अपने हिस्से का प्यार लेकर आऊंगा  क्या मैं इतना बुरा हूँ? मुझमें कोई अच्छाई नहीं?  दिन ढल गया तुम मिलने आई नहीं... तुम्हें मेरे शहर की नदी, झरने  और ठंडी हवा से मिलाने की जरूरत है  उन्हें भी तो दिखाऊँ कि  कोई उनसे भी खूबसूरत है  और इक गाने की फर्माइश थी जो तुमने सुनाई नहीं  दिन ढल गया तुम मिलने आई नहीं...  इक अच्छी फिल्म लगी है  और दो टिकटें मेरे पास हैं,  आज शाम हम वहाँ जाते  जहाँ की पानीपुरी बहोत खास है  अभी तो तुमने खाई है पिपलानी की मिठाई नहीं  दिन ढल गया तुम मिलने आई नहीं... मैंने तुम्हारे जन्मदिन का  केक मंगाकर रखा था  एक छोटा सा तोहफा भी  मैंने पैक कराकर रखा था  ...

माँ का खत

माँ का खत   Image Generated by Meta AI  ईट जोड़कर छोड़ दिया है,  अब पलस्तर ना करवाएंगे ...  बेटा तेरी नौकरी होगी  तो छत पर घर बनवाएंगे...  छत ढालने के पैसे नहीं हैं, अभी खप्पर ही लगवाएंगे... बेटा तेरी नौकरी होगी,  तो छत पर घर बनवाएंगे...  बरसात में खप्पर चुने लगेगा,  तो घर के सारे बर्तन लगवाएंगे,  बेटा तेरी नौकरी होगी,  तो छत पर घर बनवाएंगे...  कोचिंग के फीस के लिए खेत बेचा था,  वो इक दिन वापस खरीद ले आएंगे  बेटा तेरी नौकरी होगी,  तो छत पर घर बनवाएंगे...  इस बार की फसल खराब हो गई बेटा,  पर चिंता मत कर, हम आधे पेट तो खाएंगे...  बेटा तेरी नौकरी होगी,  तो छत पर घर बनवाएंगे... मेरे सोने के गहने गिरवी कर के  तेरे महीने के ख़र्चे भिजवाएंगे,  बेटा तेरी नौकरी होगी,  तो छत पर घर बनवाएंगे...  तेरी छोटी बहन कुंवारी है बेटा,  पैसे आने पर उसका सुहाग सजाएंगें बेटा तेरी नौकरी होगी,  तो छत पर घर बनवाएंगे...  तेरी बड़ी बहन के ससुराल वालों ने कहा है  कि मोटरसाइकिल दोगे तो...

प्यार नहीं करता

 प्यार नहीं करता Image Generated by Meta AI दूरी बढ़ी और बढ़ती गई और दो शख्स आम हो गए, दो अलग शहर में हम दो प्रेमी घड़ी के ग़ुलाम हो गए, पल पल खबर रखने वाला अब, याद इकबार नहीं करता वो करता है मुझसे प्यार, या प्यार नहीं करता... दिनभर रहता काम में मशगूल रात में थककर सो जाता है, मुझको वो शक्स वापस चाहिए जो हँसकर मुझमें खो जाता है, अब मैं बिंदी ना लगाऊँ, तो वो इंकार नहीं करता वो करता है मुझसे प्यार, या प्यार नहीं करता... अब कहता है कि छुट्टी नहीं है जिसने मिलने के वादे हजार किए थे, कॉलेज के ही दिन अच्छे थे, जब कूद के दीवारें पार किए थे, जिसका हर पल मेरा था, वो मेरे हिस्से इतवार भी नहीं करता वो करता है मुझसे प्यार, या प्यार नहीं करता.... हर सुबह उठकर सबसे पहले उसे मेरी आवाज की ख्वाहिश थी, मैं थोड़ा सा गुनगुना लूँ तो बस उसकी गाने की फर्माइश थी, अब मेरा गाना उसके दिल को बेकरार नहीं करता, वो करता है मुझसे प्यार, या प्यार नहीं करता... वो लड़का मुझसे लड़ता नहीं अब, रूठ जाऊँ तो मनाता नहीं, जो कहता था रानी बना कर रखेगा वो थोड़े से नखरे भी उठाता नहीं, जिसे पाकर मुझे ...

एक लड़की है...

Image generated by Meta AI एक लड़की है किसी के फोन का यूँ ही इंतजार करूं,  दिल कह तो रहा है फिर से प्यार करूं,  इक दोस्ती है जो गहराने लगी है,,  एक लड़की है जो पसंद आने लगी है... ना उसका कोई घर ना मेरा डगर है,  हम दोनों का अपना अलग ही सफर है, आते जाते हर मोड़ वो टकराने लगी है,,  एक लड़की है जो पसंद आने लगी है... वो एक मीठा सा दर्द होने लगा है,  मन फिर किसी के जुल्फों में खोने लगा है,  उसकी हँसी मेरे दिल पे छाने लगी है,,  एक लड़की है जो पसंद आने लगी है... दिल टूटा था मेरा, ठोकरें भी खाईं हैं,  मोहब्बत में आँसू उसने भी बहाई हैं,  एक दूसरे को देख के, वो पीड़ा जाने लगी है,,  एक लड़की है जो पसंद आने लगी है... "पता है आज क्या हुआ?" ये सुनने को बेताब रहता हूँ  वो दो पल मुस्कुरा दे... इसी में आबाद रहता हूँ  दिन की छोटी बड़ी बातें मुझे बताने लगी है,, एक लड़की है जो पसंद आने लगी है... एक अर्से बाद कोई मिला जो मेरे जैसा है,  जिसके लिए जरूरी है, कि इंसान दिल से कैसा है,  जो मुझे समझ कर, दिल में प्यार जगाने लगी है,,  एक ...

Govardhandhari

गोवर्धनधारी Inspired by Satsang of Premanand ji सुख समृद्धी से भरा ऐसा एक नगर था,  जिसमें गोवर्धन नामक एक डाकू का डर था,  एक दिन सेनापति सेना लेके उसके पीछे पड़ जाता है,  घोड़े पर पीछा करते, नगर में भगदड़ मच जाता है।  पास में पंडित परशुराम की सत्संग हो रही थी,  जान बचाते डाकू की साहस भंग हो रही थी,  घोड़ा छोड़ डाकू सत्संग में घुस जाता है  सर पर कपड़ा डाल श्रद्धालुओं के बीच में छुप जाता है।  पंडित जी कृष्ण की लीला गाते हैं,  कान्हा की बाल कहानी सबको सुनाते हैं,  आठ बरस का किशन गाय चराने जाता है,  पीताम्बर में सुसज्जित बालक मुरली बजाता है,  सोने की करधनी, बाजूबंध और सोने का मुकुट  मोर पंख लगाए हुए और लेके हाथ में लकुट  मनमोहन अपने सखा के साथ गायों को चराता है  ऐश्वर्य सा तेज लिए वो मंद मंद मुस्काता है।  सोना सोना सुनकर डाकू के कान खड़े हो जाते हैं  ऐसा धनी बालक सोच, दोनों आँख बड़े हो जाते हैं  सत्संग के बाद चुपके से डाकू पंडित के पास जाता है,  अपनी धारदार चाकू वो पंडित के गले पर ठहराता है। ...

छठ पूजा

Image Generated by Meta AI रहे दुनिया में कहीं भी पर इस दिन संग आते हैं  बिखरे बिखरे मोती छठ के धागे में बंध जाते हैं...  ये चार दिन साथ पूरा परिवार होता है,  कुछ ऐसा पावन छठ का त्योहार होता है...  भोरे भोर नहाकर सब कद्दू भात खाते हैं,  सात्विक भोजन का अर्थ सारी दुनिया को समझाते हैं,  साफ़ हमारा अच्छी तरह घर द्वार होता है,  कुछ ऐसा पावन छठ का त्योहार होता है...  लकड़ी के चूल्हे पर खरना का प्रसाद बनाते हैं  बच्चे बूढे रोटी खीर, केले के पत्ते पर खाते हैं  दिनभर की भूखी व्रती का ये एकमात्र फलाहार होता है  कुछ ऐसा पावन छठ का त्योहार होता है...  अगले दिन, बाँस की टोकरी में सारे फल सजाते हैं  विश्व-प्रसिद्ध, सबसे स्वादिष्ट, ठेकुआ हम पकाते हैं...  पाँव में अलता और सिंदूर का श्रृंगार होता है  कुछ ऐसा पावन छठ का त्योहार होता है...  मैथल - मगही में सभी लोकगीत गाते हैं  अमीर - गरीब नंगे पाँव चलके घाट आते हैं सर पर रखा दउरा जिम्मेदारी का भार होता है कुछ ऐसा पावन छठ का त्योहार होता है... फल फूल, धूप कपूर, घाट पर शोभ...

टूटता तारा

Image Generated from Meta AI   अगर प्यार में ये दिल मेरा, हारा ना होता,  ये शायरी ना होती, ये मुशायरा ना होता...  मैं सामने बैठे, ब्लैक-बोर्ड ही देखता रह जाता,  काँधे पे हाथ रख, तुमने अगर पुकारा ना होता...  देख कर तुम्हें मेरी धड़कन यूँ ना बढ़ती  उम्र का वो बरस अगर अठारह ना होता...  दिवाली की उसी रात को ही मर जाता मैं अगर,  एक कान में पहना झुमका तुमने उतारा ना होता... हम किसी और को भी ये दिल दे देते अगर  साड़ी पहनकर तुमने खुदको संवारा ना होता...  बात मेरे प्यार की दुनिया में ना आती अगर  दोस्तों के पूछने पर मैंने स्वीकारा ना होता...  प्यार मेरा बढ़ता गया, नंबर मेरे कमते गए,  अब रातों को बिन बात किए मेरा गुजारा ना होता...  सपनों में रोज़ तुम मिलने चली आती थी,  काश तेरे तस्वीर को मैंने इतना निहारा ना होता...  अपने दिल के प्यार को, दिल में ही रखता अगर,  तो दोस्ती और प्यार का यूं बंटवारा ना होता...  इमरोज के प्यार को मिल जाती एहमियत अगर  तो दुनिया की नजर में, मैं भी बेचारा ना होता...  तुम होती...

जरूरी था...?

जज सहाब की मोहर ने मुझे  अकेले रोता छोड़ दिया...  साथ जन्म के रिश्ते को  कानूनी पंडितों ने तोड़ दिया...  कैसे बाटेंगे वो दिन और रात  जो तुमने हमने साथ गुजारे...  ठीक है सारे अच्छे दिन तुम्हारे  और बाकी बुरे दिन हमारे....  चलो उज्जवल भविष्य तुम्हें मुबारक  वो बिता हुआ अतीत मेरे हिस्से है...  तुम्हारी मानो तो तुम सही, मेरी मानो तो मैं  किरदार सभी समान लेकिन अलग अलग किस्से हैं...  ईश्वर की कृपा से बस एक बेटा है  जो तुम्हें मुझसे ज्यादा चाहता है,  माँ - माँ की लत लगाए  तुम्हारे पल्लू से बंधा रहता है,  उसे सोमवार से शनिवार तुम रख लेना,  इतवार मुझे दे देना बस... बेटे से रोज मिलना भी मना है,  सरकारी फरमान ने यूँ किया बेबस...  सारे बर्तन चूल्हा चौकी तुम ले जाना, खाना बनाना तो मैंने कभी सीखा ही नहीं.. जीवन में तुम्हारे आने के बाद,  रसोई का चेहरा मैंने देखा ही नहीं..  हर महीने तुम्हें पैसे भिजवा दूँगा  पर जेब से मेरी अब पैसे कौन निकालेगा... दूध का खर्चा, धोबी का बकाया,  इन सब का हिसा...

Kuch bhi nahi

शब्दार्थ   महताब - चाँद, रुखसार - गाल, चारा-साज़ - डॉक्टर, जॉन - Jaun Elia कुछ भी नहीं  ईद का महताब उसके रुखसार के अलावा कुछ भी नहीं  और मेरे प्यार में, इंतज़ार के अलावा कुछ भी नहीं... उसे देखा तो जाना कि, परियों की दुनियाँ सच्ची है,, मैं तो मानता था, ब्राह्मण में इस संसार के अलावा कुछ भी नहीं... वो एक बार देख लेती है और मैं मर जाता हूँ,, आँखें उसकी सच बोलूँ, एक हथियार के अलावा कुछ भी नहीं... सुबह होती है और मैं सपने भूल जाता हूँ,, याद बस उसकी पायल की झनकार के अलावा कुछ भी नहीं... मेरे दिल के घर को बस तुमने ही हथियाया है,,  और मैं तेरे दिल के किराए-दार के अलावा कुछ भी नहीं... तू कहानी है मेरी... तू मेरी जिंदगी है...  मैं तेरी जिंदगी में एक किरदार के अलावा कुछ भी नहीं...  उसे जो पसंद है वो तोहफे महंगे आते हैं,, और मेरे जेब में रुपये चार के अलावा कुछ भी नहीं... मुझे खुद से मेहनत करना है और जग में आगे बढ़ना है,, विरासत में मिला मुझे संस्कार के अलावा कुछ भी नहीं... मैंने भी कमाएं हैं जिंदगी में कुछ ऐसे रिश्ते,, कि दौलत के नाम पर दो यार के अलावा कुछ भी नहीं... स...

Shabdo ka Sahara

  अगर मेरा महबूब इतना प्यारा ना होता, हर बाजी जितने वाला लड़का दिल हरा ना होता। उससे बात करने की कभी हिम्मत नहीं होती, पता पूछने को उसने अगर पुकारा ना होता। दो बिल्कुल जुदा लोग कभी प्यार में ना पड़ते,  अगर ईश्वर का इसमे कोई इशारा ना होता।  हम दोनों साथ में इतने खुश नजर नहीं आते तो,  लोगों में चर्चा फिर हमारा ना होता।  कॉलेज की आखिरी दिवाली रोशन ही ना होती अगर साड़ी पहन कर तुमने खुदको संवारा ना होता। झुकी नजर वाली तेरी तस्वीर और भी सुंदर आती  अगर काली बिंदी माथे से तुमने उतारा ना होता। तेरे पास रहने पर तो मैं भी खिल उठता हूँ, तेरे बगैर खूबसूरत कोई नजारा ना होता। जुदा होने में कितना दर्द है ये खबर ही ना होती अगर,  वो आखिरी शाम मेरे संग तुमने गुजारा ना होता।  सालों हमने साथ साथ एक ही कश्ती में सफर किया,  काश हमारा अलग - अलग किनारा ना होता।  होती मेरे रुबरु तो आँखों में पढ़ लेती तुम,  फिर काग़ज़ कलम और शब्दों का सहारा ना होता।  -दीपक कुमार साहू  6th March 2023 12: 37 AM

Jee kar koi mar jata hai...

जी कर कोई मर जाता है... प्यार का रंग महबूब पे कुछ ऐसा कर जाता है,  हर बार उसमें हमको नया गुलिस्तां नजर आता है...  होने को तैय्यार वो वक्त नहीं लगाती,  हँसती है वो और चेहरा संवर जाता है...  कहते हैं लोग कि जिंदगी तेज चलती है,  वो आती है सामने और आलम ठहर जाता है...  कान पकड़ते हैं लोग उस्तादों का नाम लेके  तेरा नाम लेता हूँ और हाथ दिल पर जाता है...   कृष्ण के मुख में होगा ये ब्रह्मांड मगर,  आँखों में तेरी मुझे दुनियाँ नज़र आता है...  रातों को जगना इतना भी मुश्किल नहीं,  मैं तकता हूँ तेरी तस्वीर, और सहर हो जाता है...  दोस्तों को मालूम है मुझको कैसे छेड़ा जाए,  वो लेते हैं नाम तेरा, मेरा चेहरा निखर जाता है...  मैं भी अपने चाँद को तारे देना चाहता हूँ,  पर टूटता है तारा तो टूटकर किधर जाता है?  वो तो मुझको कहती है कि "बड़े बदमाश हो गए हो"  पर मैंने सुना था मोहब्बत कर लो, बंदा सुधर जाता है...  बाजार में उसके पीछे, कभी इस दुकां कभी उस दुकां जैसे माँ का पल्लू पकड़े बच्चा,  कभी इधर जाता है, कभी उधर ...

आकांक्षा

रोज नई चुनौती, उथल-पुथल, जीवन में कोलाहल चाहता हूँ  फिर भी स्वभाव, अपना मैं, निर्मल और शीतल चाहता हूँ...  गिनती में भले अधिक हो, द्वारका की नारायणी सेना,  निहत्थे कृष्ण जहाँ उपदेश दें, मैं तो वही दल चाहता हूँ  सही और गलत की, सही परख कर सकूँ, अपने अंदर ईश्वर से, बस इतनी सी अकल चाहता हूँ... कब तक ये खामोशी, चुभती रहेगी हमारे बीच  तेरे मेरे झगड़े का मैं, अंतिम कोई हल चाहता हूँ...  किसी का दमन करने का, मुझको कोई शौक नहीं पर,  आत्मरक्षा कर सकूँ, इतना तो बल चाहता हूँ...  इंसान और इंसानियत पे, फिर से भरोसा करने लगा हूँ  टूट जाऊँ फिर से, ऐसा कोई छल चाहता हूँ... पढ़कर मेरे लेखन को तुम, हँस भी दो और रो भी दो, जिंदगी में बस इक दिन, ऐसा ही एक पल चाहता हूँ... जिन लोगों ने बीते कल में, मुश्किल में भी साथ दिया  सिर्फ उन्हीं के साथ मैं अपना, आने वाला कल चाहता हूँ ...  -दीपक कुमार साहू  6th December 2022 11 : 51 PM