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Shabdo ka Sahara

 


अगर मेरा महबूब इतना प्यारा ना होता,

हर बाजी जितने वाला लड़का दिल हरा ना होता।

उससे बात करने की कभी हिम्मत नहीं होती,

पता पूछने को उसने अगर पुकारा ना होता।

दो बिल्कुल जुदा लोग कभी प्यार में ना पड़ते, 

अगर ईश्वर का इसमे कोई इशारा ना होता। 

हम दोनों साथ में इतने खुश नजर नहीं आते तो, 

लोगों में चर्चा फिर हमारा ना होता। 

कॉलेज की आखिरी दिवाली रोशन ही ना होती अगर

साड़ी पहन कर तुमने खुदको संवारा ना होता।

झुकी नजर वाली तेरी तस्वीर और भी सुंदर आती 

अगर काली बिंदी माथे से तुमने उतारा ना होता।

तेरे पास रहने पर तो मैं भी खिल उठता हूँ,

तेरे बगैर खूबसूरत कोई नजारा ना होता।

जुदा होने में कितना दर्द है ये खबर ही ना होती अगर, 

वो आखिरी शाम मेरे संग तुमने गुजारा ना होता। 

सालों हमने साथ साथ एक ही कश्ती में सफर किया, 

काश हमारा अलग - अलग किनारा ना होता। 

होती मेरे रुबरु तो आँखों में पढ़ लेती तुम, 

फिर काग़ज़ कलम और शब्दों का सहारा ना होता। 

-दीपक कुमार साहू 

6th March 2023

12: 37 AM




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