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दो कप चाय।

दो कप चाय। चोट खाये अर्सा हुआ  दर्द अब तक काफिल है, ये गम की नदिया भरी नही  कुछ जख्म और कह रहे हमे भी तुम्हारे काफिले मे होना सामिल है। अर्ज़ किआ है, हस्तियां बनते नही युही , युही नही महल बनाने मे  ज़माने लग जाते है । कही तो ठोकर लगी होगी, कही तो सिरहाने चढ़ना हुआ होगा दुख तकलीफ आते जाते रहते है हर किसी के जीवन मे कही तो इन सब से आगे बढ़ना हुआ होगा। कद्र क्या करोगे किसी और के ज़ख्म की अभी तो तुम्हारी न खाल पूरी आयी है, ज़िन्दगी कुछ घुटों मे खत्म  होनी वाली बस दो कप चाय है। Writer  Shiva rajak 4 april 2020 12.33 am

दिल लगा रही नही है।😋

आग लगी है दोनों तरफ,💥 पर वो जाता रही नही है, दिल में हूँ बस मैं ही मैं पर वो बता रही नही है।💕 क्या पता क्या ढूंढ रही मुझमे और, वो अब सता रही नही है, वो खुश है बहोत मेरे साथ पर वो जाता रही नही है,❣️ वो दिल लगा रही ,पर फिर भी दिल लगा नही रही है।😶 मैं हूँ अब दिन ब दिन की कहानियों में उसके,🙄 हर रोज़ के सरारतो में भी मैं सामिल हूँ😁 मैं जनता हूँ सब कुछ  पर ये बात है की वो दिख रही नही है ,😅 जो भी है हमारे बीच वो जाता रही नही है, वो दिल लगा रही नही है।❣️ कोशिश कर रही है दूर रहने की मुझसे,😶 पर दूर रह पा रही नही है,😁😋 वो डर रही है किसी बात से सायद 🤔 पर बात ज़ुबान कह पा रही नही है।😏 वो डर के दिल लगा रही है, पर दिल लगा पा रही नही है,😓 वो जाता नही पा रही है पर दिल से दिल लगा नही पा रहा रही।😶 पर ये कायनात है की मानती नही,😁 वो उसे सीखा रही है😅 मोहब्बत मेरी उसे पल पल दिखा रही है,💥 एक ही दिल जी उसके पास💕 जल्द ही मुझे देने आ रही है😁😅 वो जो मोहब्बत है न  मेरी, अब मेरी होने जा रही है,😍😍 अब वो बातों बातों में बता रही  है  वो अब मुझसे दिल लगा रही है। ❤️ व...

दिन ढल- ढल जाए।

ओझल - ओझल हर पल - पल सहम - सहम कर ढल - ढल जाए  ज़िन्दगी मे दिन- दिन होते ऐसे के बदल- बदल जाए। दर - दर फिरे - फिरे डर - डर  गिरे - गिरे घर - घर उमीद  हाथो से फिसल -  फिसल जाए , दिन - दिन ऐसे - ऐसे बस ढल- ढल जाए। मौके छूटते- छटते है कही निकल - निकल जाए फिर ये दिल  दुबक के , डर के सहम - सहम कर फिर से संभल - संभल जाए। कहि कही पर होनी तो होगी मंज़िल - मंज़िल जहा  ले जा रहा है ये दिल-  दिल । दिन-  दिन निकल - निकल असफलता का सफर  सफल - सफल दिन ढल -ढल  जीत - जीत है कल - कल । तू चले चल ,  दिन ढले , रातें मे बदल जाए कल। Writer  Shiva rajak 5 feb 2020 1.24 am

तू चलता जा, बस चलता जा।

अपनी एक अलग पहचान बनाने के खोज में, जिम्मेदारियों के बोझ में, तू चलता  जा , बस चलता जा । दुष्वारियों के साथ, अलग ही मुकाम के चाह में तू जलता जा तू चलता जा ,बस चलता जा परेशान मत हो, ढूंढ रहा है तुझे वो, जो तेरे सफर की है मंज़िल बस उमीद लिए तू कार्य करता जा ,करता जा बस चलता जा , तू चलता जा। माना, खामियां है बहोत तुझमे, दुनिया भी कोनसी जो सरीफ है, तू अपनी ही धुन बनाता जा, धुन को निखारता जा, तू बनता जा , बस बनता जा, तू चलता जा ,बस चलता जा । एक दिन चाह होगी दुनिया को तुझे भी सुनने की, तू बस हर चोट के साथ, और निहरता जा, निखरता जा, तू चलता जा, बस बनता जा । वो जो लिखा है खुदा ने, होना ही है एक दिन जरूर, मौत तो नसीब मे लिखी है हर किसी की, पर मरता कोंन है हज़ूर। पर मिट्टी में फिर से मिलने से पहले कुछ अच्छा ऐसा करता जा, हर किसीको नही सही , पर किसी के दिल मे तो घर करता जा करता जा ,तू चलता जा, बस चलता जा। ये तो किरदार का खेल है, नाम, रुतबा, और पैसा सब बकवास है, मेहनत की कसम को बांध हाथो में और चलता जा, बस चलता जा। डरना या रुकना मत, इ...

वो प्यार न था।

Drawing by Shiva Rajak बडा मंझा सा था वो सब,  जवाब हाँ :" था   साफ इनकार न था, वो कुछ दिनों का था  जो प्यार न था । हैसियत से बंधी थी  इस बंधन की जोड़ी, फरेब ,झूठ से संझि , इश्क़ बेकार ही था वो प्यार न था। काल्पनिक ख्यालो को गूंद  करने भर की कोशिश थी,  उसकी एक दिल को दूसरे दिल  से जरूरत पूरी करने तक की साजिश थी, उसकी इश्क़ मेरी तरफ से साफ था,  जो एक तरफा था बस, वो प्यार न था। सुना था , यादों का नही होता अंत, वो किसी से भी हो, सच्चा इश्क़ हो तो , तो हो जाता है अनंत। दूर जाए कोई भी इश्क़ में,  तो खामोशियाँ सर चढ़ चीख उठती है, सच में क्या? मेरे कहानी में तो ऐसा कुछ न था, सच कहूँ,  यार वो प्यार न था। वो सब कुछ दिनों की जुगलबंदी, विश्वास घात से बंधी, और इंसानियत नाते सच में अंधी ये रूह के भूख से सजी, सब बेकार ही था, सब बेकार ही था, वो जो था न ,सच में प्यार न था। वो प्यार न था। `Writer  Shiva rajak.  29 nov. 2019  8:51 pm.

Chandravansh Aur Suryavansh

हमारे पुराणों में हमने कई राजाओं की कहानियाँ सुनी है। उनमें से ज्यादातर राजा या तो सूर्यवंश के होते हैं या तो चंद्रवंश के। लेकिन चंद्रवंश और सूर्यवंश की शुरुआत बहुत कम लोगों को ज्ञात है।  ब्राह्मण की रचना भगवान ब्रह्मा ने की थी। यही कारण है कि उन्हें परम पिता भी कहा जाता है। ब्रह्मा ने ही दक्ष प्रजापति की रचना की थी और ब्रह्मा को ही कश्यप मुनि और सूर्य का पिता माना जाता है। पृथ्वी का पहला पुरुष "मनु" को भी ब्रह्मा का वंशज माना जाता है। इसी तरह सूर्यवंश की शुरुआत हुई जिसमें कई महान राजाओं ने राज किया। उदाहरण दिलीप ने धर्म स्थापना में मुख्य किरदार निभाया था। उन्होंने गो रक्षा की थी। राजा हरिश्चंद्र भी सूर्यवंशी थे। उन्होंने अपनी सच्चाई से और वादा निभाने की क्षमता से सूर्यवंश का नाम बहुत ऊँचा कर दिया। सूर्यवंश के एक और राजा थे रघु। उन्होंने अपने राज में काफी दान - पुण्य किया था। उनके नाम पर ही उनके वंश का नाम रघुकुल पड़ा। इसी वंश में एक राजा थे जिनका नाम था "अज"। वे अपनी पत्नी से इतना प्रेम करते थे कि अपनी पत्नी के देहांत के बाद उन्होंने खुद भी जल समाधि ले ली...

Wo Madhosh Thi Itna

वो मदहोश थी इतना क्या बताऊँ?  वो मदहोश थी इतना  अपनी आवारगी में, मैं चला था उसके पीछे  इश्क़ की बेबसी में  मिला सिला उसकी तरफ से जब, सबक भी बना ,सिलसिला  भी मैं बन गया, उस दिन बाद जो उससे रूठा मैं, हर दिन उससे रूठता रह गया। क्या बताऊँ, वो मदहोश थी कितना, कि वक़्त बिताता गया।  वो आसमान पे आसमान छूती गई, मैं ज़मीन पे खड़ा उसे देखता रह गया, और गुम वो आसमान में हो गई। मैं भी मदहोश था उसके इश्क़ में इतना, कि उसे वक़्त रहते मैं रोक ना पाया, ढूढता रह गया उसे अपने आस-पास , और वो अपने सपनों को पूरा  कर चैन की नींद सो गई। वो मदहोश थी इस कदर  सपनों की उड़ान भरने को, कुछ ना दिखा उसे  सिवाए आसमान छूने को। सीखा गई वो , सपनों का महत्व जाते- जाते मेरी ज़िन्दगी से इस कदर, मैं चल पड़ा अपने सफर, वो चल पड़ी अपने सफर। वो मदहोश थी  इतना  के मदहोश कर गई।♥ लेखक- शिवा रजक दिनांक: 21अगस्त '2019            2:17 am