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Please don't go...

In the middle of the ocean, Below the blazing sun, I need your hand From this day, to the world's end. You are the best blessing That God can bestow.... Please don't go. We have shared good time We fought the bad time, Passing by all the length You were my real strength. You always make my day, When you call and say "Hello" Please don't go. In my deepest darkest night, When I was all alone to fight, You came as my only hope Taught me to rise up and cope. The dead and the cold winds Again started to blow, Please don't go. You always made me smile, No matter how much the situation was fragile, You hugged me with all your hearts Thus it always hurts when you depart All alone away from you, I have started feeling low Please don't go. We were happy, the pictures can't lie, Overwhelmed, I am unable to take off my eyes, Hundreds of days, Thousands of stories It's impossible to forg...

देश का दर्पण

कई सालों से हमारी - तुम्हारी सेवा में अर्पण। भारतीय रेल तीन शब्दों में देश का दर्पण। प्लेटफॉर्म में ट्रेन आते ही एक दफा मैंने मौके पे, सीट रोकी रुमाल फेंककर इक झरोखे से। रेलगाड़ी में बैठकर मैं जा रहा था अपने घर। भारत देश का पूरा सच आ रहा था मुझे नज़र। बोरियत दूर करने का एकमात्र सहारा। खिड़की के बाहर वो बदलता नज़ारा। बाहर थे कई बड़े घर और बड़े होटल आलीशान। साथ ही खपरैल और झोपड़ में तड़पती उस गरीब की जान। धरती से आसमान तक बढ़ता उद्योग। हरियाली को खाता जाता, जंगल और गाँव में ये रोग। कभी मिली ठंडी हवा, कभी दिखा प्रकृति का शोषण। बदलती जलवायु और पलपल पनपता प्रदूषण। कभी साफ जलाशय इतना कि दिख जाए उसका तल। कभी ना चेहरा दिखने पाए!! इतना भी गंदा होता है जल… देखने के बाद बाहर का हाल। मैंने किया अपने सिर को अंदर की ओर बहाल। अब सुनाता हूँ आपको खिड़की के अंदर का सार। अंदर के लोगों का अलग था वेश विभिन्न था प्रकार। ये समाज के वो लोग थे जिनकी ये थी दुविधा। कि सारे नियम कानून के ऊपर थी उनकी अपन...

कहानी अभी खत्म नहीं हुई है - अध्याय 1

अध्याय 1 "जिंदगी हमारे साथ बहुत अज़ीब खेल खेलती है।" लोग मुझसे पूछते हैं कि दीपक तुम ये कविताएँ और कहानियाँ कैसे लिख लेते हो? और मैं जब उन्हें जवाब देता हूँ, तब मेरे जवाब का पहला वाक्य वही होता है जो मैंने इस कहानी के पहले पंक्ति में लिखा है। आपको पहले मैं ये बता दूँ कि ये कहानी, कहनी नहीं बल्कि हकीक़त है। यह कहानी शुरू होती है 6 मई 2015 से क्यूँकि इसी दिन मेरा दस दिन का वो रोमांचक सफर शुरू हुआ। ये दिन इसलिए भी यादगार है क्यूँकि इस दिन चार साल बाद मैंने ट्रेन के अंदर कदम रखा था। करीबन चार साल बाद मैं अपने बिहार जा रहा था। जाते वक़्त मुझे पता नहीं था कि लौटकर मुझे एक कहानी लिखने का सार मिल जाएगा। मैं, मेरी माँ, मेरे पिता और मेरा भाई पवन सभी करीबन साढ़े आठ बजे सम्बलपुर स्टेशन से इस्पात सुपरफास्ट एक्स्प्रेस से रवाना हुए। रवाना होने की इतनी जल्दी क्या है, रवाना कैसे हुए ये भी सुन लीजिए। मैं एक टी - शर्ट और जीन्स के साथ बाईं कलाई पर मेरी प्रिय घड़ी पहने खड़ा था। और मेरा भाई नीली टी - शर्ट, जीन्स और महँगे जूते पहन खड़ा था। साथ ही साथ उसने एक ऐनक भी लगाई थी। जिसे वो बा...

लड़कपन में

लड़कपन में प्रिय के गीत गा रहा हूँ, मैं डगमगा रहा हूँ, लड़कपन में, खो बैठा हूँ होशोहवास, मैं सम्भाल नही, सिर्फ इतरा रहा हूँ, मैं डगमगा रहा हूँ। प्रिय को भी कर रहा हूँ परेशान, माँ पे भी चिल्ला रहा हूँ, मैं बेमिज़ाज़ हो रहा हूँ, मैं डगमगा रहा हूँ। अस्तित्व भूल गया हूँ, खुद को बीरबल सा ज्ञानी, या कोई नायाब सा अवतार समझ रहा हूँ, मैं गलत हूँ न, हाँ मैं डगमगा रहा हूँ, लड़कपन में मैं, लड़कपन में प्रिय, दूर सब से बिछड़ रहा हूँ, मैं छिड़ रहा हूँ,। लड़कपन में प्रिय के गीत गा रहा हूँ, मैं डगमगा रहा हूँ।.. -Shiva Rajak 27may 2019

अलविदा

A Tribute to our Teachers दोस्तों मेरे, ध्यान से देखो उस तरुवर को। ऐसा नहीं लगता कि हमारे गुरुवर हो। हमारे पेड़ रूपी गुरुओं के जीवन में हम छात्र। तो हैं केवल कुछ पक्षी मात्र। जिस तरह पेड़ की डाली पर पक्षी का डेरा होता है। ठीक उसी तरह शिक्षक के दिलों में हमारा बसेरा होता है। शीत हो या ग्रीष्म, हर मौसम की मार से से हमको बचाया था। वो पेड़ जैसे गुरु ही थे जिन्होंने हम पर छत्रछाया पहुँचाया था। होश सम्भालने के बाद इनका हम पे ऐसा हुआ असर। कि पक्षी ने पेड़ को और हमने विद्यालय को मान लिया था अपना घर। पेड़ रूपी शिक्षक ने ही सिखाया एक दूसरे से जुड़ना। दूर क्षितिज में हुनर के पंख लगाकर उड़ना। उड़ने की शुरुआती कोशिश में धीरे धीरे। जब धरातल में औंधे मुँह गिरे। तब यही था वो घर, यही था वो घोसला। जिसने वापस दिलाया, हिम्मत और हौसला। इन्हीं के कारण कई बार सफलता ने हमारे कदम चूमे। तब हमारे चहकने पर, वे भी हमारे संग झूमे। इनकी शीतल छाया हेतु कई मुसाफिर इनकी छाया में रुकते हैं। पेड़ की भाँति गुणी होने के कारण ही वे विनम्रत...

वो लड़की सचमुच प्यारी है...

कोई दरिया जैसे छिपा रखा हो,, इतनी गहरी उसकी आँखें... पूरा फलक नापेगी इक दिन उड़ान भरेंगी उसकी पाखें... सबसे अलग, वो सबसे न्यारी है,, एक बात तो लिख कर ले लो,, वो लड़की सचमुच प्यारी है। जिसे चाहे अपना बना ले, इतने अच्छे हैं उसके अल्फाज़। कानों को राहत दे जाए,, इतनी सुरीली उसकी आवाज़। सबसे मीठी, सबकी दुलारी है,, एक बात तो लिख कर ले लो,, वो लड़की सचमुच प्यारी है। जिस पर हर कोई दिल हार जाए,, इतनी सुंदर उसकी हँसी। मुस्कुराते देख कर लगे जैसे,, मेरी खुशी है उसमें बसी। उसी हँसी में मैंने अपनी जान वारी है। एक बात तो लिख कर ले लो,, वो लड़की सचमुच प्यारी है। वक़्त तेज़ चलने लगता है,, जब संग मेरे हो उसका साथ। याद मुझे बस आता है वो, मेहँदी मेरी और उसका हाथ। चारों ओर बस उसका नशा, उसकी ही खुमारी है। एक बात तो लिख कर ले लो,, वो लड़की सचमुच प्यारी है। बेहद खूबसूरत लगती है, वो पायल मेरी और उसके पाँव। कभी मनाकर देखो उसे, वो नखरे उसके और उसका भाव। सबसे अलग उसकी मेरी दोस्ती यारी है,, एक बात तो लिख कर ले लो,, वो लड़की सचमुच प्यारी है। वो थक कर लौटकर आना उस तक,, वो नींद मेरी और कांधा उसका। देखा घटा का स...

The TCS Girl

It was 7 in the evening and my heartbeat was raging. With passing time, I was getting restless, My eyes were constantly on Whatsapp. A call or a message I was waiting for either, But till quarter to 8, I got neither. Then a whistle sound of notification, “I have done it, will call you in sometime.” Oh! My excitement from the message knew no bounds. I was running here and there, my feet not touching ground. She called an hour later describing the interview, Of questions and enquiries and how she sailed through. The programming jargons passed over my head But her joyous voice entered my heart. I was longing to listen to these blissful words, Since the beginning of the placement season. I had tried to console her earlier, when she got rejected, But unfortunately then, I lacked sufficient reason. As she returned from Bhubaneswar a day later, We met in the evening at our college CCD And had a pleasant chatter On topics ranging from her various p...