Skip to main content

Posts

Jee kar koi mar jata hai...

जी कर कोई मर जाता है... प्यार का रंग महबूब पे कुछ ऐसा कर जाता है,  हर बार उसमें हमको नया गुलिस्तां नजर आता है...  होने को तैय्यार वो वक्त नहीं लगाती,  हँसती है वो और चेहरा संवर जाता है...  कहते हैं लोग कि जिंदगी तेज चलती है,  वो आती है सामने और आलम ठहर जाता है...  कान पकड़ते हैं लोग उस्तादों का नाम लेके  तेरा नाम लेता हूँ और हाथ दिल पर जाता है...   कृष्ण के मुख में होगा ये ब्रह्मांड मगर,  आँखों में तेरी मुझे दुनियाँ नज़र आता है...  रातों को जगना इतना भी मुश्किल नहीं,  मैं तकता हूँ तेरी तस्वीर, और सहर हो जाता है...  दोस्तों को मालूम है मुझको कैसे छेड़ा जाए,  वो लेते हैं नाम तेरा, मेरा चेहरा निखर जाता है...  मैं भी अपने चाँद को तारे देना चाहता हूँ,  पर टूटता है तारा तो टूटकर किधर जाता है?  वो तो मुझको कहती है कि "बड़े बदमाश हो गए हो"  पर मैंने सुना था मोहब्बत कर लो, बंदा सुधर जाता है...  बाजार में उसके पीछे, कभी इस दुकां कभी उस दुकां जैसे माँ का पल्लू पकड़े बच्चा,  कभी इधर जाता है, कभी उधर ...

आकांक्षा

रोज नई चुनौती, उथल-पुथल, जीवन में कोलाहल चाहता हूँ  फिर भी स्वभाव, अपना मैं, निर्मल और शीतल चाहता हूँ...  गिनती में भले अधिक हो, द्वारका की नारायणी सेना,  निहत्थे कृष्ण जहाँ उपदेश दें, मैं तो वही दल चाहता हूँ  सही और गलत की, सही परख कर सकूँ, अपने अंदर ईश्वर से, बस इतनी सी अकल चाहता हूँ... कब तक ये खामोशी, चुभती रहेगी हमारे बीच  तेरे मेरे झगड़े का मैं, अंतिम कोई हल चाहता हूँ...  किसी का दमन करने का, मुझको कोई शौक नहीं पर,  आत्मरक्षा कर सकूँ, इतना तो बल चाहता हूँ...  इंसान और इंसानियत पे, फिर से भरोसा करने लगा हूँ  टूट जाऊँ फिर से, ऐसा कोई छल चाहता हूँ... पढ़कर मेरे लेखन को तुम, हँस भी दो और रो भी दो, जिंदगी में बस इक दिन, ऐसा ही एक पल चाहता हूँ... जिन लोगों ने बीते कल में, मुश्किल में भी साथ दिया  सिर्फ उन्हीं के साथ मैं अपना, आने वाला कल चाहता हूँ ...  -दीपक कुमार साहू  6th December 2022 11 : 51 PM

My Dear Love

You make my lips smile Just with a love text, And I ask myself Why are you so perfect? You drifted into my heart Leaving me insane, Every time I see you I fall for you again... I crave for you badly Wanting us to unite, Like the comforting pillow  That I hug in the night... You with me still feels Just like a dream, I wake up with ur thoughts With every morning's beam... My feelings for you  are growing so deep, You are the only reason Behind my lack of sleep... I see my world in you As you are my life, Proposing here by Will you be my wife ?

As I Flew Over Kiev

  March arrived and I started my journey back home in a jolly mood After spending a comfortable winter in the lovely place of Hirakud With a wish again to return next winter, here or perhaps some other place India is a beautiful country, after all, can’t find anywhere such solace My country is beautiful too, but the winters harsh A bird that I am, can’t dare to bear the weather’s wrath   But as I started my travel, I sensed things were not the same as they were Where there was peace before, Oh! How tensed people were The students worried about jobs in future, the govt about what steps to take I saw some mothers crying for their children, a fear of separation, I saw fathers concerned about the safety of their sons and daughters But what was wrong, what was happening, it was beyond my comprehension   I crossed India into Pakistan and there was the same old power game, same instability I went then into Central Asia, and it was all great, with lo...

मुझको मेरे हिस्से का वही प्यार चाहिए...

पल भर के लिए मुझको देख  कितना खुश हो जाती थी। घंटों बातें करते करते मेरे  आँखों में खो जाती थी। आँखों में तेरी मुझे वही इकरार चाहिए  मुझको मेरे हिस्से का वही प्यार चाहिए कॉलेज के बहाने हमने कितनी फ़िल्में देखीं हैं। सिर्फ तुमको मुझको मालूम है कि  फ़िल्में किसने देखी हैं?  थिएटर के भीतर वाला, वही अंधकार चाहिए,  मुझको मेरे हिस्से का वही प्यार चाहिए तेरी तस्वीरें ले ले कर   खुद खिंचवानी भूल जाता था।  तेरी उँगली, से भी जब  मेरा फोन खुल जाता था।  फोन पर मेरे, तेरा फिर, वही अधिकार चाहिए  मुझको मेरे हिस्से का वही प्यार चाहिए लुडो खेलते-खेलते, मैं तेरी  गोटी मार ना पाता था।  तेरे जीतने पर झूठ मूठ का  मुह बना के रूठ जाता था।  तेरी वो मुस्कान जीतकर, मुझको हार चाहिए,  मुझको मेरे हिस्से का वही प्यार चाहिए जब हम मिले थे तब  उम्र छोटी थी पर इरादे पक्के थे।  मासूम इश्क में हमने तो  बच्चों के नाम सोच रक्खे थे।  आज भी मुझे तेरे साथ पूरा परिवार चाहिए  मुझको मेरे हिस्से का वही प्यार चाहिए मेरी छोट...

Shayari No. 85

  काश हर रोज मेरा जन्मदिन होता, इसी बहाने तुम मुझे एक फोन तो करती...

Shayari No. 84

  छोटी-छोटी बातों से ही खुश रहते थे कभी, छोटी-छोटी बातों पर तुम अब अक्सर रूठ जाती हो..