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Shayari No. 72

   हो मेरी भी गलती, वो खुदको दोष देता है, माफ़ी माँग माँग कर खुद को कोस लेता है, मैं ख़ामोश होकर देख लूँ जो उसे भरी आँखों से,,  वो दोनों हाथों से मेरे आंसू पोंछ देता है...

रुख़सत

अब से पहले आँसू शराब में घुलाया ही नहीं था इससे पहले किसी ने मेरा मुँह खुलाया ही नहीं था  इस तरह जन्मदिन पर फोन किया तुमने  जैसे कभी तुमने मुझे भुलाया ही नहीं था  मिलकर भी दोस्त तुम्हारे पराई नजरों से देखते हैं ठीक तरह से तुमने मिलाया जुलाया ही नहीं था  मैंने पुकारा तुमको तो तुमने मुह फ़ेर लिया इस तरह तो किसीने रुलाया ही नहीं था  कुछ इस तरह महफिल से हमने रुख़सत कर दी जैसे इस जलसे में कभी बुलाया ही नहीं था ढक कर चादर फिर सर पर हाथ फ़ेरा माँ ने इस तरह तो किसीने सुलाया ही नहीं था…  -दीपक कुमार साहू  25/05/2022 07:00 PM

ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...

रोज कहकर जाते हैं, आज जल्दी घर आ जाएँगे,  रोज सुबह 9 से रात के 10 बजे जा रहे हैं, ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...  ये पता है कि पीछे से वार किसने किया है,  फिर भी चुप चाप ज़ख्म सीए जा रहे हैं,  ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...  रोने का मन कर रहा है हमारा,  पर आँसू के घूंट पीए जा रहे हैं,,  ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...  अब खुद से प्यार नहीं रहा पर,  दूसरों के खातिर सजे जा रहे हैं,  ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...  एक सच है जो हम शुरू से जानते हैं, फिर भी झूठे वादे किए जा रहे हैं, ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं... ये किताब भी हम पढ़ेंगे नहीं,  ना जाने फिर भी क्यूँ लिए जा रहे हैं?  ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...  जानते हैं हम तैय्यार नहीं हैं, फिर भी हर इम्तेहान दिए जा रहे हैं,  ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...  एक जिंदगी है जो हम जीना चाहते हैं, एक जिंदगी हम जिए जा रहे हैं, ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं...     ऐ जिंदगी तेरे मजे नहीं आ रहे हैं… -दीपक कुमार साहू...

बाकी है...

अभी बस दिन भर काम किया है,  अभी तो पूरी शाम बाकी है...  अभी तो चंद लोग जानते हैं मुझे, दुनिया में करना नाम बाकी है...  मैं हार जाऊँ ऐसा हो नहीं सकता,  जब तक ना जीत लूँ, कहूँगा अंजाम बाकी है...  दो मुलाकात में मुझे राम ना समझ लेना,  अंदर मेरे नटखट घनश्याम बाकी है...  दोस्त शराब पीकर चले गए, मैं बैठा रह गया,  वो आई नहीं उसके आँखों का जाम बाकी है... वो कातिल है, देख ले एक नजर तो मर जाता हूँ,  और दिल भी चुराया है, चोरी का इल्ज़ाम बाकी है  रास्ते पर तुमने नजरअन्दाज कर दिया,  अगली बार मिलना, दुआ सलाम बाकी है… याद है एक बात शुरू की थी तुमने,  उस पर पूर्ण विराम बाकी है...  "अच्छा सुनो..." कहकर तुम चुप हो गई थी,  तुम कहकर जो ना कह पाई वो पयाम बाकी है...  चंद पैसों के लिए खुद को नीलाम किया है,  वक़्त आने दो, मेरा सही दाम बाकी है...  अभी तो बस कुछ शायरी लिखी है,  लिखना पूरा कलाम बाकी है...  तुम दर्द देके अरे कहाँ चल दिये,, याद रखना मेरा इंतकाम बाकी है… -दीपक कुमार साहू  23rd March 2022

Shayari No. 71

  हो दोस्त या हो दुश्मन, सभी संग खेलते हैं,  ये होली का त्योहार है सभी रंग खेलते हैं,  क्या सोच के ना जाने दो देश युद्ध कर रहे हैं,,  जंग का शौक है तो आओ शतरंज खेलते हैं... 

Shayari No. 70

  तेरा रकीब के साथ दिखना कुछ ऐसा कर जाता है, मैं आँखें फ़ेर लेता हूँ फिर भी आँख भर जाता है लोग कहते हैं मुझे शतरंज खेलना नहीं आता,, मैं रानी को बचाने जाता हूँ, मेरा राजा मर जाता है.. 

Shayari No. 69

  ईमानदारी के रास्ते पर कई चोर पड़ जाते हैं,  हर सरकारी दफ्तर में घूसखोर पड़ जाते हैं,  कसम खाई थी सनम से अब बात नहीं करेंगे,,  वो सामने आ जाएं तो हम कमजोर पड़ जाते हैं...