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तुमने जो दी थी बद्दुआ

तुमने जो दी थी बद्दुआ…  हाँ जिससे मैं प्यार करती थी,  उसने मुझको छोड़ दिया।  तुम तो दूर जा ही चुके थे,  उसने भी मुह मोड़ लिया।  तुम जैसे तड़पे थे, मैं भी वैसे तड़प गई,,  तुमने जो दी थी बद्दुआ….. लग गई।  वो कहता है "तुमसे मैं प्यार नहीं करता"  ठीक वैसे ही जैसे, मैंने तुमसे कहा था।  हाँ पता चला मुझे दिल टूटने का दर्द,  वही दर्द जो तुमने सहा था।  मेरे भी दिल में नफ़रत की आग सुलग गई,,  तुमने जो दी थी बद्दुआ….. लग गई।  मन में मेरे भी गुस्सा जागा,  हफ्तों तक ना सोई मैं।  रातों को हाँ तीन बजे तक,  तुम जैसा ही रोई मैं।  किसी के जाने से, जिंदगी इतनी उलझ गई,,  तुमने जो दी थी बद्दुआ….. लग गई।  ना तुम थे… ना वो था…  ना ही कोई और।  मेरे अकेलेपन में था केवल  टिक टिक करते घड़ी का शोर।  प्यार के दरिया में दोस्ती भी झुलस गई,,  तुमने जो दी थी बद्दुआ….. लग गई।  अब वो जिस लड़की के साथ है, क्या वो मुझसे अच्छी है??  ये सवाल मुझे अंदर ही अंदर खा रहा है।  तुम्हें भी हमें देखकर ...

Shayari No. 19

 आज इतना अकेला लग रहा है, जैसे किसीने बाजार में ये कह कर छोड़ दिया हो कि "यहीं रहना, कहीं जाना मत... मैं थोड़ी देर में आती हूँ.."

Shayari No. 18

जुदा होकर मुर्झा गए हम दोनों कुछ ऐसे, गुलाब को साख से तोड़कर ले गया हो कोई जैसे... Happy Rose Day

Shayari No. 17

इक सितम है कि आँखें खुलते ही तुम चले जाते हो... और दफ्तर में लोग मुझसे देरी की वजह पूछते हैं...

सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ…

एक घर है जहाँ अपने रहते हैं, एक कमरा है जहाँ सपने रहते हैं।  एक ताख है जहाँ तस्वीर रखी है,  एक टेबल है, जहाँ माँ ने खीर रखी है।  एक डॉगी है जो मुझे जान से प्यारा है,  एक टेड्डी है जो मेरा दुलारा है,  इन्हीं के संग कुछ आखिरी पल बीता रही हूँ,  मैं सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ….  एक फ्रिज है, जहाँ से आइसक्रीम चुराती हूँ,  एक गुड़िया है जिसे कहानियाँ सुनाती हूँ।  एक दीवार है, जहाँ मेरे मेडल टंगे हैं,  एक खिड़की, एक दरवाजा है जिसे मैंने रंगे हैं।  एक गुल्लक है जिसमें पैसे जमा हैं,  एक शहर है जहाँ आज भी हसीन समा है।  इन्हीं के संग कुछ आखिरी पल बीता रही हूँ,  मैं सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ….  एक आँगन हैं जहाँ कुछ फुल खिले हैं,  एक स्कूल है जहाँ से जीवन के उसूल मिले हैं।  एक आईना है जिसे देखकर सवरती हूँ,  एक छिपकली है जिससे आज भी डरती हूँ।  एक रसोई है जहाँ मुझे जाने से परहेज है,  एक कोना है जहाँ स्वयं महादेव हैं।  एक किताब है जिसे पूरा पढ़ा नहीं,  एक साइकिल है जिससे मन अभी भरा नहीं।  इन्...

Shayari No. 16

 वो कहती है कि  "सिर्फ दुख और परेशानी में याद आती हूँ तुम्हें.." कैसे बताऊँ कि मैंने उसे  भगवान का दर्जा दे रखा है...

Shayari No. 15

 लोग कहते हैं कि मोहब्बत करने वाले अमर हो जाते हैं, वो मोहब्बत किया और मर गया...