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Shayari No. 28

  तेरा हँस कर मिलना मुझसे, हर बार ये उम्मीद दिलाता है कि "सब ठीक हो जाएगा" और ये उम्मीद मुझे हर बार रिश्ता तोड़ने से रोक लेता है...  -दीपक कुमार साहू 

Shayari No. 27

  वो समझोता था या था टूटने का डर? मालूम नहीं...  मैंने सवाल पूछने छोड़ दिए, अब झगड़े नहीं होते... 

Shayari No. 26

  अब हद से ना आगे बढ़ो दोस्तों,  मेरी वकालत कर ना लड़ो दोस्तों,,  उनकी याद आती है और मैं रो पड़ता हूँ,  यूँ मोहब्बत की बातें ना करो दोस्तों...  -दीपक कुमार साहू 

Shayari No. 25

  समझूँ तारीफ़ या मान लूँ तौहीन? उसका ये कहना कि  "वो बिल्कुल तुम जैसा है..." -दीपक कुमार साहू 

Shayari No. 24

  तेरे मैसेज की धीमी धुन से भी उठ जाता है,, वो लड़का जिसे अलार्म के शोर में भी सोने की आदत थी...  -दीपक कुमार साहू 

Shayari No. 23

  पहले तो मचलते ही रह गया रात भर...  फिर रोने से संभलते ही रह गया रात भर...  उसने वादा जो किया कि वो फोन करेगी,,  मैं करवट ही बदलते रह गया रात भर...  -दीपक कुमार साहू 

Shayari No. 22

कभी तुम भी हमें मना लेती  तो अच्छा लगता,, ओह... हाँ, हमने तो कभी बताया भी नहीं कि कब रूठे थे हम... -दीपक कुमार साहू